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पूर्व सीएम के बयान, समाजसेवा से हटकर घोटाले और आंदोलन ने बनाई हरियाणा सरकार की पहचान

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि विपक्षी दलों में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला कभी कभी देखने को मिला है। यह तो मानो जैसे नेताओं की शान है कि उन्हें विपक्षी दलों के साथ आरोप-प्रत्यारोप का खेल खेलना लाजमी होता है।

खासकर प्रदेश सरकार में बात की जाए तो बीजेपी और कांग्रेस सरकार का कुछ ज्यादा ही दमखम देखने को मिलता है और हो सकता है आने वाले समय में भी मिलता ही रहे। ऐसा ही कुछ नजारा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा प्रदेश सरकार के गठबंधन पर सवालिया निशान के हमले में देखने को मिलता है।

अब एक बार फिर घोटाले और आंदोलन को प्रदेश सरकार की पहचान बताते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा भाजपा जजपा गठबंधन पर हमले करते हुए मनोहर लाल खट्टर से करीब आधे दर्जन सवाल पूछे हैं।

पूर्व सीएम ने कहा कि यह सरकार किसानों से हाथ मिलाने की बजाय उनसे पंजा लड़ा रही है। अपनी विफलताओं को विपक्ष पर थोपने की इस सरकार की आदत बन चुकी है। भाजपा की सरकार बने छह साल से ज्यादा समय हो गया,

लेकिन अभी तक सरकार एक भी उपलब्धि हासिल नहीं कर सकी और इसका दोष वह कांग्रेस के सिर मढ़ने में देरी नहीं लगाती।

चंडीगढ़ स्थित अपने सरकारी निवास पर पत्रकारों से रूबरू होते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि उपलब्धियों के नाम पर सरकार के खाते में घोटाले, आंदोलन और हिंसा है।

भाजपा के साथ इस का में जजपा भी सहयोगी बन गई है। जजपा को लोगों ने भाजपा के विरुद्ध वोट दिए थे, लेकिन अब वह भी भाजपा की हमसफर बनकर प्रदेश व किसान को बर्बादी के रास्ते पर लेकर जा रही है।

हुड्डा ने कहा कि किसानों से आंख मिलाने की बजाए सरकार उन्हें आंख दिखा रही है। कृषि, शिक्षा, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बिजली और मंहगाई के मामले में सरकार ने प्रदेश को रसातल में पहुंचा दिया है।

हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार हरियाणा की जनता को बहुत महंगी पड़ रही है। लगातार पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली के दाम बढ़ रहे हैं। स्टांप ड्यूटी, किसानों की लागत और प्रदेश पर कर्ज में इजाफा हो रहा है। भाजपा को आत्ममंथन करना चाहिए कि दो साल पहले हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटें जीतने वाली पार्टी के नेता आज जनता के बीच क्यों नहीं जा पा रहे हैं।

किसानों के प्रति सरकार का रवैया पूरी तरह नकारात्मक है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पहले से आंदोलनरत किसानों को सरकार अब मंडियों में परेशान कर रही है। रजिस्ट्रेशन, नमी, मिश्रण और मैसेज का बहाना बनाकर गेहूं की खरीद में देरी की जा रही है।

उन्‍होंने कहा कि गेहूं खरीद में मानक नमी की मात्रा को 14 से घटाकर 12 प्रतिशत और मानक मिश्रण की मात्रा को 0.75 से घटाकर 0.50 प्रतिशत करना किसान विरोधी फैसला है। ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ वेबसाइट 16 लाख किसानों का ट्रैफिक नहीं झेल पा रही है।

सर्वर डाउन होने की वजह से अब तक आठ लाख किसान ही रजिस्ट्रेशन करवा पाए हैं। बचे हुए 50 प्रतिशत किसान अपना गेहूं कैसे बेचेंगे? इसका जवाब सरकार के पास नहीं है।

हुड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनियों ने किसानों के 75 फीसदी से अधिक दावों को खारिज कर दिया है। बीमा कंपनियों ने तीन साल में हरियाणा के किसानों के 1 लाख 96 हजार 795 बीमा दावों को खारिज किया है। डाक्टरों के 56 प्रतिशत पद खाली हैं। स्कूलों में टीचर्स के 45 हजार पद खाली चल रहे हैं। हेड मास्टर और प्रिंसिपल के भी आधे पद खाली हैं।

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