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अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता की उक्ति चरितार्थ कर रहे है एनआईटी विधायक

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता यह कहावत इन दिनों एनआईटी 86 विधायक नीरज शर्मा पर चरितार्थ हो रही है। 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान जिले भर में बीजेपी की सरकार बनी वही एनआईटी विधानसभा से एकमात्र कांग्रेसी विधायक नीरज शर्मा विधायक चुने गए।

विधायक नीरज शर्मा ने भारी मतों से विधानसभा चुनाव जीत लिया और एनआईटी 86 के कर्ता-धर्ता बन गए। उन्हें विधायक का पदभार संभाले करीब 2 साल का समय बीत चुका है परंतु उनके क्षेत्र में विकास के नाम पर कुछ नहीं हो पाया है।

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता की उक्ति चरितार्थ कर रहे है एनआईटी विधायक
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता की उक्ति चरितार्थ कर रहे है एनआईटी विधायक

एनआईटी 86 के इन हालातों से राजनीतिक विशेषज्ञ यह कयास लगा रहे हैं कि कहीं विधायक अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता का शिकार तो नहीं हो गए।


आपको बता दें कि जिले में 6 विधानसभा सीट लगती है जिसमें बल्लभगढ़ से मूलचंद शर्मा, तिगांव से राजेश नागर, बड़खल से सीमा त्रिखा, ओल्ड फरीदाबाद से नरेंद्र गुप्ता, पृथला से नैनपाल रावत विधायक बने हैं वही एकमात्र एनआईटी में कांग्रेस के विधायक हैं।

नहीं हो पाया है विकास
एनआईटी 86 विधायक नीरज शर्मा को अपना पदभार संभाले करीब 2 साल का वक्त बीत चुका है।‌ इस बीच एनआईटी 86 में एक भी बड़ी योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। एनआईटी 86 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में बहुत सी समस्याएं बनी हुई है। लोग अपनी समस्याओं को लेकर विधायक नीरज शर्मा से मिलते हैं परंतु समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता है।


अगर बात करें विधायक नीरज शर्मा की तो विधायक काफी मधुर भाषी हैं और लोगों की समस्याओं को प्रखर रूप से सरकार तक पहुंचाने का काम करते हैं परंतु इसके बावजूद भी उनके क्षेत्र में किसी भी प्रकार का कुछ खास विकास देखने को नहीं मिल रहा।

अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता की उक्ति चरितार्थ कर रहे है एनआईटी विधायक
अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता की उक्ति चरितार्थ कर रहे है एनआईटी विधायक

वही अगर बात करें जिले में कांग्रेस की तो जिले मेंक्षइन दिनों कांग्रेस जिला अध्यक्ष का पद खाली है। कांग्रेस आलाकमान द्वारा इस पद को जल्द से जल्द भरने की कवायद भी शुरू हो चुकी है। कुछ समय पहले भी इस पद को लेकर कॉन्ग्रेस पार्टी के द्वारा एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जिसमें कांग्रेस के नेता आपस में ही भिड़ गए। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के अंदर राजनीति चल रही है और पार्टी में एकजुटता नहीं है। इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता व पार्टी नेता भी मौजूद नहीं थे।

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