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सरकारी आदेशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग सख्त, कार्यवाही के दिए निर्देश

सरकार के आदेशों की अवहेलना करने वाले निजी स्कूल संचालकों को लेकर जिला शिक्षा विभाग सख्त है। शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारी से अपने क्षेत्र में नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग में जमा करने के आदेश दिए हैं।


दरअसल, शिक्षा विभाग ने महामारी के बढ़ते मामलों के चलते हरियाणा भर के पहली से आठवीं तक के स्कूलों को को बंद करने के आदेश जारी किए थे जिसको लेकर जिले के निजी स्कूलों में रोष देखने को मिल रहा है।

बीते रविवार को बल्लभगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के द्वारा एक बैठक का आयोजन किया गया जिसमें यह निर्णय लिया गया कि सोमवार को जिले के सभी स्कूल संचालक स्कूल खोलेंगे और सुचारू रूप से अपना काम करेंगे।

योजना के अनुसार निजी स्कूल संचालकों ने सोमवार को स्कूल खोलें तथा आदेशों की अवहेलना की जिस पर अब शिक्षा अधिकारी सख्त है और उन्होंने सभी स्कूलों की सूची तैयार करने के आदेश जारी किए हैं। शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी पत्र के अनुसार यह सूची जिला उपायुक्त कार्यालय में उपलब्ध करवाई जाएगी।

जिला शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी का कहना है कि नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूल संचालकों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे स्कूल संचालकों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।


स्कूलों का किया गया निरीक्षण
शिक्षा विभाग द्वारा इस विषय में खंड शिक्षा अधिकारी व अन्य अधिकारियों की एक कमेटी का भी गठन किया गया है जो जिले भर के निजी स्कूलों का निरीक्षण कर रही है।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं स्कूल
महामारी के चलते लगी लॉकडाउन से निजी स्कूलों की आर्थिक स्थिति काफी चरमरा गई थी वही अब एक बार फिर से पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए स्कूलों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं, जिसको लेकर निजी स्कूल संचालकों में रोष व्याप्त है। निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि सरकार को निजी स्कूलों के विषय में सोचने की जरूरत है। सरकार के बदलते नियमों के चलते स्कूलों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

निजी स्कूल संचालकों की मांग है कि सरकार निजी स्कूलों को भी फंड प्रदान कराए। वही आपको बता दे कि जैसे ही सरकार ने पहली से आठवीं तक के स्कूलों को बंद करने के आदेश जारी किए हैं वैसे ही निजी स्कूल एसोसिएशन सक्रिय हो गए हैं और लगातार सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

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