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आखिर क्यों स्कूल बसों का रंग पीला होता है? जानिये इसका कारण, पड़ जाएंगे सोच में

स्कूल बसों की यादें आपके ज़हन में अभी भी जीवित होंगी। स्कूल बसों का सफर हर किसी के लिए ख़ास होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर इन बसों का रंग पीला क्यों होता है? आज हम इसका कारण आपको बताएंगे। आपने ध्यान दिया होगा कि हर स्कूल बस पर अपने स्कूल का नाम होता है और ये बस पीले रंग की पेंट होती हैं। रंगों का अपना ही एक महत्व है।

रंगों का महत्व सभी जगह होता है। बात चाहे सरकारी हो या गैरसकारी। अगर हम देखें तो ट्रैफिक लाइट में अलग-अलग रंगों की लाइट लगाई गई हैं जिसकी मदद से ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाता है। उसी प्रकार से स्कूल बस को भी एक रंग दिया गया है और वो है पीला।

ट्रैफिक सिग्नल के रंगों को अकसर हम इग्नोर कर देते हैं। रेड लाइट पर रुकना होता है लेकिन हम चल पड़ते हैं। ये हम सब जानते हैं कि सफेद लाइट के विभिन्न घटकों के बीच लाल रंग में अधिकतम तरंग दैर्ध्य लगभग 650 nm होती है और इसलिए आसानी से ये बिखरती नहीं हैं और दूर से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। चूंकि लाल रंग आमतौर पर सावधानी के साथ जुड़ा हुआ है, इसलिए यह स्कूल बस को पेंट करने का अच्चा विकल्प नहीं होगा।

हर रंग के पीछे काफी गहरे राज़ छुपे होते हैं। इन राज़ों की अलग ही कहानियां हैं। लेकिन इन बसों को पीले रंग का इसलिए पेंट किया गया क्योंकि पीला रंग हमें जल्दी आकर्षित करता है। यह देखा गया है कि आमतौर पर हमारे दैनिक जीवन में जब अनेक रंगों के बीच हम आते हैं तो पीला रंग आंखों में सबसे अधिक दिखाई देने वाला रंग होता है। स्कूल बस के इस रंग को नेशनल स्कूल बस क्रोम येलो भी कहते है।

स्कूल बसों में काफी घटनाएं भी होती हैं। इन बसों में सीसीटीवी भी लगाए गए हैं। उच्च न्यायालय ने 2012 में स्कूलों में बदलाव के लिए कुछ गाइड लाइन्स जीरी की थी जिसमें कहा गया था कि स्कूल की बसों पर स्कूल का नाम होना चाहिए। प्रधानाचार्य का मोबाइल नंबर अंकित होना चाहिए। प्राथमिक उपचार की सुविधा भी बसों में उपलब्ध होनी चाहिए।

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