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टूटी हुई है टॉयलेट शीट और नही है पानी की टंकी, क्या सिर्फ नाम के लिए बनाए गए है स्मार्ट टॉयलेट

नगर निगम ने लोगों की सुविधाओं के लिए स्मार्ट टॉयलेट की व्यस्था की थी परंतु देखभाल के अभाव में इन टॉयलेट्स की स्थिति बद से बदतर हो गई है। इन स्मार्ट टॉयलेट की देखरेख में भी अनियमितता पाई गई है जिसको लेकर नगर निगम मेयर सुमन बाला ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को शिकायत पत्र लिखकर सीएम विजिलेंस जांच की मांग की थी। मांग को मान लिया गया था और अब स्मार्ट टॉयलेट्स की जांच चल रही है।

दरअसल, कुछ महीने पहले नगर निगम मेयर सुमन बाला को स्मार्ट टॉयलेट से संबंधित शिकायतें आ रही थी। शिकायत पर कार्यवाही करते हुए उन्होंने एसडीओ सुरेंद्र खट्टर को कई बार टॉयलेट का निरीक्षण करवाने के निर्देश दिए परंतु हर बार एसडीओ द्वारा बात को टाल दिया जाता था।

मेयर ने एसडीओ को सख्त लहजे में निरीक्षण करवाने के आदेश दिए जिसके बाद एसडीओ द्वारा उन्हें एनआईटी 5 स्थित शौचालय का निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण के दौरान मेयर सुमन वाला के द्वारा उनसे टॉयलेट की अनियमितताओं को लेकर सवाल पूछे गए जिस पर एसडीओ सुरेंद्र खट्टर ने मेयर के साथ दुर्व्यवहार किया तथा उन पर सरकार को बदनाम करने के आरोप लगाए।

इस घटना के सभी वार्ड पार्षदों में रोष देखने को मिला वही मेयर ने स्मार्ट टॉयलेट्स को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पत्र लिखा तथा सीएम विजिलेंस जांच की मांग की।

मेयर सुमन बाला ने बताया कि इस मामले की अभी जांच चल रही है। जैसे ही जांच पूरी होती है, सूचना को सार्वजनिक किया जाएगा।

गौरतलब है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में सीमेंटेड तथा प्री- फैबरीकेटेड टॉयलेट की व्यवस्था की गई है। ‌ इन टॉयलेट्स को लेकर नगर निगम के पास करोड़ों रुपए का फंड आया था परंतु फंड के बावजूद भी टॉयलेट की स्थिति बद से बदतर बनी हुई थी। कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि स्मार्ट टॉयलेट्स फंड में भी नगर निगम के कनिष्ठ तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने घपला किया गया है।

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