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दूसरी लहर में संक्रमितों में दिख रहे है यह नए लक्षण, जानिए विद्या नायर से कि किस तरीके से करें अपना बचाव

महामारी के दूसरी लहर में आए दिन 500 से ऊपर एक्टिव केस आ रहे है ऐसे में लोगों को अपना ध्यान रखने की बेहद जरूरत है। महामारी में किस तरीके से अपने बचाव करें, से संबंधित प्रश्नों का जवाब देने के लिए विद्या नायर ने कुछ टिप्स सांझा की है।

प्रश्न : इस दूसरे चरण में कोरोना संक्रमित नए मरीजों में पहले चरण से अलग कौन से नए लक्षण दिखाई दे रहे हैं?
उत्तर : इस बार का संक्रमण थोड़ा अलग है पहले नजला, जुखाम, खाँसी सामान्यता देखा जाता था। इस बार के संक्रमण में नजला, जुखाम के कम बल्कि पेट के लक्षण जैसे दर्द , उलटी , डायरिया आदि भी सामान्यता मरीजों में देखे जा रहें है।

प्रश्न : बच्चों में किस तरह के लक्षण हैं?
उत्तर : बच्चो में पहले बहुत माइल्ड लक्षण थे जैसे हल्के खाँसी, जुखाम आदि पर अब बच्चों में भी सीरियस इन्फेक्शन देखे जा रहे है। साथ ही वो कोरोना को फैलाने में संभावित कारक हो सकते है।

प्रश्न : ऐसे मरीज जिनका इलाज करते समय नए अनुभव सामने आए हों?
उत्तर : कभी-कभी RT- PCR टेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आती है पर मरीज के लक्षण एवं सिटी स्कैन के कारण हम कोविड-19 के निदान को पकड़ पा रहे है। क्योकि इस समय म्युटेंट स्ट्रेन RT- PCR के तो नेगेटिव होता है परन्तु मरीज कोरोना पॉजिटिव होता है साथ ही पहले कोरोना में 5 से 7 दिन के बाद निमोनिया होता था पर इस बार मरीजों में दो से तीन दिन में ही निमोनिया के लक्षण उभर रहे है।

प्रश्न : सप्ताहांत यानी वीकेंड कर्फ्यू को वैज्ञानिक दृष्टि से कितना कारगर मानते हैं? क्या वीकेंड पर कितने घंटे तक किसी के संपर्क में नहीं आने पर कोरोना संक्रमण से बचाव हो सकता है?
उत्तर : सरकार ने जो कर्फ्यू लगाया है यह सामाजिक दवाब के लिए ज्यादा जरुरी है क्यूंकि लोग कोरोना को लेकर बिलकुल ही लापरवाह हो गए थे जिसके कारण आज हम सभी इस मुश्किल में फंस गए है |

प्रशासन की यह कठोरता जरूर लोगों में इस बीमारी के प्रति संजीदगी लाएगी और लोग फिर से शारीरिक दूरी और हैंड सेनिटिज़ेशन को गंभीरता से लेंगे | सरकार के साथ साथ यह आमजन की भी जिम्मेदारी है कि वह सरकार द्वारा बनाई गयी किसी भी बंदिश का फायदा ना उठाये और सभी नियमों का पालन करें | जहां तक बात संक्रमण से बचने के लिए घंटों की है तो इस प्रकार की कोई भी रिसर्च अभी तक सामने नही आयी है जिसके बाद यह कहा जा सकें | हम कोरोना विस्फोट के मुहाने पर है यहां से जरुरी एतिहात से बीमारी नियंत्रित भी हो सकती है अन्यथा अनियंत्रित भी हो सकती है।

प्रश्न : छोटे स्तर पर पारिवारिक गेट-टू-गेटर में क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर : कोशिश करें कि किसी की भी प्रकार के सामाजिक प्रोग्राम का हिस्सा ना बनें | अगर मज़बूरी में करना पड़ रहा है तो मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें और कोशिश करें की कोई भी प्रोग्राम बंद जगह में बिलकुल आयोजित ना करें |

प्रश्न : कोरोना लक्षण होने पर इलाज के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। मसलन- शुरूआती लक्षण होने पर क्या करें, क्या सावधानी बरतें और डाक्टर के पास कब जाएं? भर्ती होने के लिए कब जाएं?
उत्तर : करोना लक्षण आने पर अपने आपको आइसोलेट कर ले और RT- PCR जरूर करवाएं। साथ ही साथ फिजिशियन से ऑनलाइन परामर्श जरूर ले ताकि सपोर्टिव ट्रीटमेंट शुरू हो जाएं इसके साथ-साथ घर पर थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर को अपना ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर करने के लिए रखें। जब ऑक्सीजन लेवल 95 से कम होने लगे या सांस लेने में या छाती में ज्यादा रूकावट महसूस होने लगे या फिर लगातार हाई ग्रेड फीवर (दवाइयों के बावजूद ) तब आपको किसी भी हॉस्पिटल में दिखाना चाहिए ताकि उचित इलाज शुरू किया जा सके।

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