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महिला सरपंच की सोच ने बदल दिया फरीदाबाद के इस गांव के तालाब का जीवन

जिला फरीदाबाद के ज्यादातर गांवों में तालाबों की हालत काफी बिगड़ चुकी हैं। गांवों के तालाबों की हालत दयनीय हो चुकी है। लेकिन कई गांव ऐसे भी हैं जहां तालाबों का अच्छा प्रयोग हो रहा है। ऐसा ही एक गांव फरीदाबाद का फरीदपुर गांव है, जिसकी महिला सरपंच सविता कौशिक हैं।

इस गांव की महिला सरपंच सविता कौशिक व उनके पति दया कौशिक ने मिलकर गांव के तालाब को जीवंत कर दिया है। इनके प्रयासों से न केवल तालाबों की साफ-सफाई की गई बल्कि के तालाब की नए सिरे से खुदाई भी कराई गई। साथ ही तीन तालाब विधि द्वारा भी यहां काम किया जा रहा है।

बता देंगे तीन तलाक विधि एक ऐसी विधि है, जिसके माध्यम से तालाब के गंदे पानी को सिंचाई योग्य बनाया जाता है। इस विधि में सबसे पहले तालाब की सफाई की जाती है, उसके बाद खुदाई की जाती है तथा एक साथ तीन तालाब बनाए जाते हैं।

पहले गांव का गंदा पानी एक तालाब में जाता है, उसके बाद दूसरे व तीसरे तालाब में पाइप द्वारा वही पानी जाता है। गंदे पानी में एकत्र कूड़ा – करकट व अन्य कचरा पहले वह दूसरे तालाब में ही रह जाता है जबकि सिंचाई योग्य पानी तीसरे तालाब में पहुंच जाता है। तीन तालाब विधि द्वारा फसलों की सिंचाई भी की जा सकती है।

गांव के अधिकतर तालाब कब्जे में अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहे हैं। मजेदार लोगों के किनारों पर कूड़ा करकट जमा रहता है, मच्छरों के कीड़े मकोड़ों के घर भी यही तालाब है। जिस कारण तालाबों की हालत जर्जर हो रखी है।

तालाबों में जमा गंदगी के कारण तालाब का पानी जमीन में रिसने की बजाय ओवरफ्लो हो आसपास के क्षेत्र में भरना शुरू हो जाता है। तालाब की साफ सफाई कर उन्हें जीवंत बनाने की मुहिम द्वारा तालाब कब्जा होने से बच जाते हैं।

फरीदपुर गांव की महिला सरपंच सविता कौशिक का कहना है कि तालाबों को जीवंत करना अति आवश्यक है। इसके अनेकों फायदे होते हैं। तालाबों के जीवंत होने से भूजल स्तर बढ़ता है। साथ ही इस पानी को सिंचाई के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है।

फरीदपुर गांव की महिला सरपंच की सोच ने एक ऐसे तालाब को जीवंत किया जहां हमेशा कूड़ा करकट ही पड़ा रहता था। महिला सरपंच सविता कौशिक को स्वच्छता के मामले में सम्मानित किया जा चुका है।

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