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कंटेनमेंट जॉन की तरफ नहीं दे रहा है कोई ध्यान, लेकिन मोर्चरी पर दिया जा रहा है खास तवज्जो

बीके अस्पताल में आए दिन महामारी की चपेट में आने वाले मरीजों की टेस्टिंग उपचार किया जाता है। लेकिन इस दौरान कभी किसी महामारी की चपेट में आने वाले मरीज की मृत्यु हो जाती है।तो उसकी डेड बॉडी को मोर्चरी में रखा जाता है।

जैसे कि आप सभी जानते हैं कि आए दिन महामारी की चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। इसी वजह से बी के अस्पताल में टेस्टिंग करवाने आने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

जिसकी वजह से बीके अस्पताल में भी टेस्टिंग करवाने की भीड़ नजर आती है।  मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है वैसे ही हर रोज 1 से 2 मरीज़ों की महामारी की चपेट में आने से मृत्यु भी हो रही है। उन मरीजों की डेड बॉडी को कुछ समय के लिए मोर्चरी में रखा जाता है। बीके अस्पताल में भी सेक्सी दो महामारी की चपेट में आने वाले मरीजों की मृत्यु होती है ।

उसकी डेड बॉडी को मोर्चरी में रखा जाता है। मोर्चरी को सेनेटीज़ करने के लिए बीके अस्पताल में मशीन आ चुकी है। आरएमओ डॉ रोहित ने बताया कि बीके अस्पताल की मोर्चरी में कोई ना कोई महामारी की चपेट में आने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद डेड बॉडी आती है। जिसकी डेड बॉडी को मोर्चरी में रखा जाता है। जैसे कि आप सभी जानते हैं कि मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

इसी वजह से वह डेडबॉडी मोर्चरी में रखी जाती है। तो उसके बाद उसको सेनेटीज़ के लिए मशीन बीके अस्पताल में आ चुकी है। अब जैसे ही कोई भी महामारी की चपेट में आने वाले मरीज की डेड बॉडी में रखी जाती है। तो वह डेड बॉडी के जाने के बाद बैटरी को सैनिटाइज किया जाएगा। ताकि मोर्चरी में काम करने वाले कर्मचारी व डॉक्टरों को किसी प्रकार की कोई भी परेशानी ना हो।

इसके अलावा महामारी की चपेट में आने वाले मरीज़ की डेड बॉडी जाने के बाद मोर्चरी को पूरी तरह से सेनेटीज़ किया जाता है। उन्होंने बताया कि मोर्चरी के अलावा ओपीडी और एमरजैंसी को भी समय-समय पर सेनेटीज़ करते रहेंगे ताकि अन्य मरीजों किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो।

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