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जानिये रैगिंग करने पर क्या होती है सजा और किसे हो सकती है सजा, कानून के ये हैं नियम

रैगिंग शब्द पिछले कुछ वर्षों के दौरान बहुत अधिक सुनने को मिला है। इस शब्द से अकसर स्कूली बच्चे डर जाया करते हैं। रैगिंग शब्द पढ़ने में सामान्य लगता है। इसके पीछे छिपी भयावहता को वे ही छात्र समझ सकते हैं जो इसके शिकार हुए हैं। आधुनिकता के साथ रैगिंग के तरीके भी बदलते जा रहे हैं। रैगिंग आमतौर पर सीनियर विद्यार्थी द्वारा कॉलेज में आए नए विद्यार्थी से परिचय लेने की प्रक्रिया।

कई बार इसके कारण विद्यार्थियों की जान गई है। वैसे तो सभी शिक्षण संस्‍थानों और विद्यालयों में पूरी तर‍ह बैन लगाया जा चुका है। मगर फिर भी कुछ सीनियर छात्र विद्यालय में दाखिला लेने वाले नए छात्रों का परिचय लेने की आड़ में उन्‍हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं और उनका उत्‍पीड़न करते हैं।

काफी बार ऐसा होता है कि रैगिंग के नाम पर विद्यार्थी अश्लील हरकतें भी कर देते हैं। रैगिंग के नाम पर समय-समय पर अमानवीयता का चेहरा भी सामने आया है। गलत व्यवहार, अपमानजनक छेड़छाड़, मारपीट ऐसे कितने वीभत्स रूप रैगिंग में सामने आए हैं। सीनियर छात्रों के लिए रैगिंग भले ही मौज-मस्ती हो सकती है, लेकिन रैगिंग से गुजरे छात्र के जहन से रैगिंग की भयावहता मिटती नहीं है।

लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए कोर्ट को सरकार भी काफी गंभीर हुए। आज स्थिति कुछ काबू में दिखाई देती है। एंटी रैगिंग कानून के तहत दोषी पाए जाने पर तीन साल की सश्रम कैद भी हो सकती है और दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं रैगिंग के मामले में कार्रवाई न करने या मामले की अनदेखी करने पर कॉलेज के खिलाफ भी कार्रवाई होगी और आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है।

देश के बहुत हिस्सों से रैगिंग की भयावह तस्वीरें सामने आ चुकी हैं। कभी हंसी मजाक के लिए शुरू हुई रैंगिंग आज कई विद्यार्थियों की जान पर आ गई है। भारत के राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन ने रैगिंग के कारण संकट में आने वाले छात्रों की मदद के लिए जून 2009 से ही कार्य करना शूरू कर दिया था। यदि किसी छात्र की कोई भी वरिष्ठ छात्र रैगिंग लेता है तो वे टोल फ्री नम्बर – 1800 – 180 – 5522 और ई-मेल – helpline@antiragging.in में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।

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