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छठे नवरात्रे पर वैष्णोदेवी मंदिर में हुई मां कात्यायनी की भव्य पूजा, श्रद्धालुओं ने की अरदास लगाई

नवरात्रों के पांचवें दिन सिद्धपीठ मां वैष्णोदेवी मंदिर तिकोना पार्क में मां कात्यायनी की भव्य पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर मंदिर में प्रातःकालीन आरती के दौरान मां कात्यायनी की पूजा और हवन यज्ञ किया गया। श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी से मन की मुराद मांगी। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा के लिए पधारे श्रद्धालुओं ने मां से आर्शीवाद मांगा।

इस मौके पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। काफी अधिक संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर में पहुंचकर मा स्कंद की पूजा की और अर्शीवाद ग्रहण किया। इस अवसर पर विशेष तौर पर मंदिर में मौजूद प्रधान जगदीश भाटिया ने मंदिर में आने वाले भक्तों से टीकाकरण लगवाने की अपील की।

बता दें कि नवरात्रों के विशेष पावन अवसर पर मंदिर में टीकाकरण का कैंप लगाया गया है। भाटिया ने कहा कि महामारी से लड़ाई लडऩे के लिए सभी लोगों को वैक्सीन अवश्य लगवानी चाहिए। तभी हम इस जानलेवा बीमारी से जीत पाएंगे। उन्होंने मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं से सोशल डिस्टेंस और मास्क लगाने के नियमों का पालन करने की भी अपील की।

पूजा अर्चना के अवसर पर भाटिया ने श्रद्धालुओं को मां कात्यायनी के धार्मिक एवं पुरौणिक इतिहास की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मां कात्यायनी को शहद और केसर अतिप्रिय है। भक्त उन्हें शहद और केसर का भोग लगाते हैं। मां का प्रिय रंग सुनहरा है, जोकि मां को बहुत पसंद है।

माँ पार्वती ने राक्षस महिषासुर का वध करने के लिए देवी कात्यायनी का रूप धारण किया। यह देवी पार्वती का सबसे हिंसक रूप है, इस रूप में देवी पार्वती को योद्धा देवी के रूप में भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवी पार्वती का जन्म ऋषि कात्या के घर पर हुआ था और जिसके कारण देवी पार्वती के इस रूप को कात्यायनी के नाम से जाना जाता है।

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