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बेहतरीन कार्यशैली के चलते जिले में एक भी पालतू पशु गंभीर बीमारी से नहीं है ग्रसित: एसडीम अपराजिता

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एसडीएम अपराजिता ने बताया कि उपमंडल में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों कि बेहतर कार्यशैली की वजह से पूरे उपमंडल में एक भी पालतू पशु मुहँखुर एवं गलघोटू की बीमारी से ग्रस्त नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि उपमंडल में कुल 63758 पालतू पशु हैं। इनमें दुधारू पशु भी शामिल है। इसके अलावा पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा गत वर्ष दुग्ध प्रतियोगिताएं आयोजित करवा के मुर्रा नस्ल की भैसे और हरियाणा नस्ल की गौ पालकों गुणवत्ता युक्त अधिक मात्रा में दुध देने पर प्रोहत्सान स्वरूप 5 लाख 80 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की गई है। सरकार की हिदायतों अनुसार दूध देने वाली मुर्रा नस्ल की भैंसे और हरियाणा नस्ल की गायों के मालिकों को 10 हजार से लेकर के 30 हजार रुपये तक की धनराशि के प्रति पशुपालक को नकद इनाम प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए गए हैं।

बेहतरीन कार्यशैली के चलते जिले में एक भी पालतू पशु गंभीर बीमारी से नहीं है ग्रसित: एसडीम अपराजिता

इसके अलावा बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार स्थापित करने के लिए महिला एवं किसान जागृति कैंप लगाकर पालतू पशुओं का बीमा करने और 21 बड़ी डेरियों के लिए बेरोजगारों को स्वयं रोजगार चलाने के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण दिलवा कर स्वरोजगार प्रदान करने का काम किया है।

उपमंडल के पालन एवं डेयरी विभाग के कार्यालय के चिकित्सा अधिकारी डॉ. रणवीर सिंह ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि उपमंडल में डेयरी एवं पशुपालन विभाग व सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार एसडीएम के दिशानिर्देश और विभाग की उपनिदेशक डॉ. नीलम आर्या के मार्ग दर्शन में उपमंडल के 63 हजार 758 पालतू पशुओं जिनमें 14 हजार 163 गोवंश, 40 हजार 166 भैंसों, 20 हजार 741 भेडो और एक हजार 311 बकरियों तथा 1 हजार 117 सूअर वंश के पालतू पशुओं को विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा मुंहखुर एवं गलघोटू की बीमारी से बचाव के लिए गत वर्ष साल में दो बार टीकाकरण का विशेष अभियान चलाकर 97 हजार 374 टीके पालतू पशुओं को घर-घर जाकर लगाने का काम किया।

बेहतरीन कार्यशैली के चलते जिले में एक भी पालतू पशु गंभीर बीमारी से नहीं है ग्रसित: एसडीम अपराजिता

इसका परिणाम यह है कि आज बल्लभगढ़ उपमंडल में एक भी पालतू पशु गलघोटू एवं मूहँखुर की बीमारी से ग्रस्त नहीं है। उन्होंने आगे बताया कि इसके अलावा 4 महीने से अधिक आयु के बछड़ा, बछड़ी, कटड़ा, कटड़ी के पशुओं को भी टीका लगाया और 3 हफ्ते के बाद उन्हें बूस्टर टीका भी लगाया गया।

डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि भेड़ और बकरियों में आंतरिक जहर, चेचक, पीपीआर बीमारी के बचाव के टीके लगाए गए। जिनसे इन पालतू पशुओं को भी बीमारी से पूर्ण रूप से बचाया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग के पशु चिकित्सकों द्वारा 30 हजार 739 पालतू पशुओं का बीमारी से ग्रस्त पालतू पशुओं का उपचार किया गया। जिनमें से 5 हजार 21 पशुओं की सर्जरी की गई। 7 हजार 170 पालतू पशुओं का प्रजनन संबंधी बीमारियो का इलाज किया गया और 31 हजार 925 मरीज पशुओं के पेट के कीड़े मारने वाली दवा देकर उनका उपचार किया गया।

बेहतरीन कार्यशैली के चलते जिले में एक भी पालतू पशु गंभीर बीमारी से नहीं है ग्रसित: एसडीम अपराजिता

डॉ. रणवीर सिंह ने आगे बताया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा दुग्ध प्रतियोगिताएं आयोजित करके 5 लाख 80 हजार रूपये की धनराशि 32 पशु पालकों को हरियाणा सरकार की हिदायतों अनुसार मुर्रा नस्ल की भैंसों और हरियाणा नस्ल की गायों को गुणवत्ता युक्त अधिक मात्रा में दूध देने पर इनाम स्वरूप प्रोत्साहन धन राशि प्रदान की गई है। यह धनराशि 13 भैंस मालिकों और 19 देसी गाय के मालिकों को इनाम स्वरूप प्रदान की गई है।

उन्होंने आगे बताया कि महिला एवं किसान जागृति योजना के तहत पशुपालन विभाग द्वारा गत वर्ष उपमंल में 30 कैंप लगाए गए। इन कैंपों में लोगों को जागरूक करने का काम किया। जिसके दौरान 6 हजार 945 पशुओं का बीमा भी किया गया। इसके अलावा 1 हजार 99 अनुसूचित जाति के लोगों के पालतू पशुओं का बीमा पशुपालन एवं विभाग द्वारा अलग से किया गया। उन्होंने बताया कि उपमंडल में 21 बड़ी दुधारू पशुओं की डेरिया स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बनावाई गई। जिनमें से 13 डेरियां अनुसूचित जाति के पशु पालक किसानों को की स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बनवाई गई।

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