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दिल्ली रच रही है फरीदाबाद को बदनाम करने की साजिश, धन्यवाद कहने की जगह बता रही हैं कसूरवार

संक्रमण का कहर इन दिनों भारत की राजधानी दिल्ली पर दुखों के पहाड़ की तरह टूट पड़ा है। दिल्ली में जिस तरह संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है, हालत को भांपते हुए दिल्ली सरकार ने नियंत्रण पाने हेतु एक सप्ताह का लॉकडाउन भी लगा चुकी हैं।

वहीं दूसरी तरफ मरीजों की बढ़ती संख्या और ऑक्सीजन की कमी के चलते हरियाणा और यूपी सरकार को दिल्ली के मुख्यमंत्री हो, उपमुख्यमंत्री या फिर पुलिस आयुक्त आरोप लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

सर्वप्रथम दिल्ली के सीपी द्वारा यह बयान दिया गया कि 22 अप्रैल को सुबह साढ़े 8 बजे प्राइमस अस्पताल से यह जानकारी मिली थी

कि जो ऑक्सीजन रिफलिंग टैंक सुबह आठ बजे लिंडे कंपनी से फरीदाबाद पहुंचने वाले थे वह अस्पताल पहुंच ही नहीं पाए। जिसके चलते 150 मरीजों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता केवल अगले 5-6 बजे तक चलेगी

वही कुछ समय पश्चात दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा यह बात ट्वीट की गई कि उनके द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से संपर्क साधा गया था।

जिसके उपरांत हरियाणा से दिल्ली तक ऑक्सीजन ट्रकों के परिवहन की सुविधा में अपना समर्थन देने की बात कहीं गई थी। सीएम केजरीवाल ने बताया कि सीएम मनोहर लाल खट्टर ने उन्हे पूर्ण समर्थन करते हुए आश्वासन भी दिया है।

इसके उपरांत दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर दिल्ली में हो रही ऑक्सीजन की कमी के लिए हरियाणा से लेकर यूपी सरकार को कसूरवार ठहराया। सिसोदिया ने कहा कि, ऑक्सीजन को लेकर दिल्ली में और देश के कई हिस्सों में अफरा-तफरी का माहौल है। इसकी वजह है कि केंद्र द्वारा कोटा बढ़ाने के बावजूद कई राज्यों द्वारा ऑक्सीजन पर कंट्रोल करने की कोशिश हो रही है।

हरियाणा सरकार पर आरोप और उंगली उठते देख हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि दिल्ली सरकार स्वयं हरियाणा के ऑक्सीजन टैंकरों को लूटने में लगी है, और बावजूद उसके आभार व्यक्त करने के स्वयं प्रदेश को कसूरवार ठहरा रही है। इतना ही नहीं अनिल विज ने तो यह तक कह दिया कि दिल्ली द्वारा उनके ऑक्सीजन को चोरी तक किया जा रहा है।

खैर, हकीकत अब कुछ भी हो लेकिन जिस तरह के हालात है इस समय चाहिए कि इन मुख्यमंत्रियों को राजनीति के दलदल से निकलकर आमजन को अपना समर्थन देते हुए उन्हें एक पुनः जीवन दें। अब देखना यह है कि इस तरह के आरोप प्रत्यारोप लगते रहने के बावजूद भी क्या प्रदेश सरकार दिल्ली सरकार की मदद के लिए आगे कदम बढ़ाएगी या फिर यह किसी घमासान युद्ध की ओर अग्रसर होता हुआ प्रतीत होगा।

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