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संक्रमित मरीजों को जीवन देने वाले योद्धाओं की पुष्टि करने के लिए दर-दर भटकते उनके परिजन

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कोरोना योद्धा यह शब्द आपने उस वक्त जरूर सुना होगा जब दिन और रात संक्रमित मरीजों को बचाने के लिए भूखे प्यासे इलाज में जुटे स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग और निगम विभाग के कार्यकर्ताओं को कोरोना योद्धाओं के नाम से संबोधित किया गया था।

इतना ही नहीं दिन और रात एक करके संक्रमित मरीजों की जान बचाने के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले इन योद्धाओं को प्रदेश सरकार की तरफ से 50 लाख रुपए जीवन बीमा भी दिया गया था। मगर आज इसी जीवन बीमा की रकम के लिए उक्त योद्धा के परिजनों को यह साबित करना भारी पड़ रहा है कि उनके परिजन भी कोरोना योद्धाओं में शामिल थे।

संक्रमित मरीजों को जीवन देने वाले योद्धाओं की पुष्टि करने के लिए दर-दर भटकते उनके परिजन

गौरतलब, जिले में ऐसे पांच डॉक्टर कोविद मरीजों का इलाज करते अपनी जान गवां चुके हैं। लेकिन उन्हें बीमा क्लेम देने के नाम पर अजीबो गरीब प्रश्न पूछकर असमंझस में डाला जा रहा हैं। इसी बाबत जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने इसका विरोध करते हुए केंद्र को इस संबद्ध में पत्रा जारी किया है।

स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना योद्धा बताते हुए केंद्र ने 50 लाख रुपये का जीवन बीमा दिया था। जिनमें जिले के पांच डॉक्टरों डॉ. रेनू गंभीर, डॉ. आभा सब्रवाल, डॉ. केपी भार्गव, डॉ. अर्चना भाटिया, डॉ. संतोष ग्रोवर ने अपनी जान गंवा दी। परिवार ने जिला स्वास्थ्य विभाग के जरिये प्रदेश निदेशालय तक पत्राचार कर बीमा राशि का भुगतान करने के लिए पत्र लिखा। अब परेशानी है कि केंद्र सरकार की ओर से नियम इतने सख्त कर दिए गए हैं कि नियमों के तहत डॉक्टर खुद को कोरोना वॉरियर साबित करने के लिए जूझ रहे हैं।

संक्रमित मरीजों को जीवन देने वाले योद्धाओं की पुष्टि करने के लिए दर-दर भटकते उनके परिजन

महामारी की पहली लहर के बाद अब दूसरी लहर से जूझ रहे देश में बीते वर्ष कुल 756 डॉक्टरों की मौत हो गई। इन सभी को केंद्र की ओर से कोरोना योद्धा बताया गया। हालांकि इनमें से महज 168 डॉक्टरों के परिजन ही 50 लाख रुपये के जीवन बीमा का लाभ ले सके। इसके अलावा महज 287 स्वास्थ्य कर्मी के परिजनों को इस बीमा का लाभ मिला। शेष मृतक स्वास्थ्य कर्मियों के परिजन लीगल सर्टिफिकेट, मौत का कारण व इस बात का प्रमाण पत्र लेने के लिए जूझ रहे हैं कि स्वास्थ्य कर्मी और डॉक्टर की मौत कोरोना वॉरियर के रूप में हुई।

संक्रमित मरीजों को जीवन देने वाले योद्धाओं की पुष्टि करने के लिए दर-दर भटकते उनके परिजन

26 मार्च 2020 को स्कीम का लाभ देने के लिए केंद्र की ओर से घोषणा की गई। शुरुआती चरण के बाद इसे 24 मार्च 2021 तक के लिए लागू किया गया। मौजूदा समय में स्वास्थ्य कर्मियों को ऐसा कोई लाभ नहीं दिया जा रहा, जिसमें उन्हें योद्धा मानकर खास लाभ दिए जा रहे हों। आईएमए की जिला प्रवक्ता सुरेश अरोड़ा ने बताया कि आईएमए ने सरकार के इन नियमों की आलोचन की है।

साथ ही केंद्र को पत्र लिख कर बीमा की समय सीमा आगे बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि सरकार डॉक्टरों से इस बात का प्रमाण मांग रही है कि उन्होंने कोरोना संक्रमितों का उपचार किया कि नहीं, उनकी ड्यूटी संक्रमितों के उपचार में थी या नहीं, उनकी मौत का कारण क्या रहा। वहीं, निजी डॉक्टरों को इस लाभ को लेने में खासी परेशानी आ रही है, जबकि केंद्र की योजना का लाभ का वादा करते वक्त स्वास्थ्य कर्मियों जिसमें, वॉर्ड बॉय, नर्स, आशा कार्यकर्ता को भी शामिल किया गया। ऐसे में इतने कड़े नियमों को कौन सा वर्ग पूरा करेगा और किसको लाभ मिलेगा यह कहना भी मुश्किल है।

संक्रमित मरीजों को जीवन देने वाले योद्धाओं की पुष्टि करने के लिए दर-दर भटकते उनके परिजन

इंश्योरेंस के कागजात जिले से आगे ही नहीं बढ़े
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक ग्रोवर की पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष ग्रोवर बीते वर्ष मरीजों को देखते हुए संक्रमण का शिकार हुई। वह निजी अस्पताल में संक्रमण से जंग हार गई। परिवार ने सरकार के बीमा क्लेम के लिए आवेदन किया, लेकिन दस्तावेज में कमियां दिखाकर कागजात जिला स्तर पर ही अटक गए। वह अपना दर्द बताते-बताते रो पड़े। वह बोले हर दिन सर्दी-खांसी के लक्षणों वाले मरीजों का पूरा रिकॉर्ड जिला स्तर पर साझा किया। पत्नी संक्रमित हुई और उपचार के दौरान मौत हो गई। अब यह साबित करना पड़ रहा है कि वह कोरोना योद्धा थी।

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