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जानिये आखिर कैसे काम करता है शेयर बाजार, काम करने का तरीका है काफी मज़ेदार

युवा हो या फिर बुज़ुर्ग हर कोई शेयर मार्किट की तरफ प्रभावित रहता है। सभी शेयर बाजार में इन्वेस्ट करना चाहते हैं। देश में आजकल हर कोई शेयर बाजार की बात कर रहा है। लंबी अवधि के निवेशक, शार्ट टर्म ट्रेडर्स और निश्चित रूप से रोमांचकारी स्पेक्युलेटर्स , हर कोई खेल का एक हिस्सा बनाता है। जानना चाहते हैं कि स्क्रैच से शेयर मार्केट कैसे काम करता है? लेकिन, सवाल यह है कि भारतीय समुदाय के अधिकांश लोगों में जोखिम न लेने वाला रवैया रहता है।

शेयर बाजार के दीवानों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में काफी ज़्यादा हुई है। भारतीय शेयर बाजार में निवेश करने के बजाय निश्चित आय निवेश करना चाहते हैं या सोने में निवेश करना पसंद करते हैं।

जोखिम लेने का नाम ही शेयर बाजार है। रिस्क के बिना शेयर बाजार में ट्रेडिंग नहीं हो सकती है। इस लाइन में ऐसा कहा जाता है कि समझदारी से शेयर लेने वाले सहज बुद्धि के निवेशक अन्य सभी निवेश साधनों के बीच उच्चतम संभावित रिटर्न पाते हैं। लंबी अवधि के लिए, यदि निवेशक एक मजबूत फंडामेंटल समर्थन के साथ क्वालिटी शेयरों का चयन करता है, तो ये सबसे अच्छी निवेश संपत्ति हैं।

अखबारों में स्टॉक की खबरें पढ़ने वालों की कतार भी काफी लंबी है। रिस्क लेकर ही स्टॉक मार्किट में इन्वेस्ट किया जा सकता है। शेयर बाजार के शब्दजाल में, “बाजार” शब्द के कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं, लेकिन अक्सर प्राइमरी बाजार और सेकेंडरी बाजार दोनों को निरूपित करने के लिए एक सामान्य शब्द का उपयोग किया जाता है।

हर देश में स्टॉक मार्किट के अपने – अपने रूल होते हैं। इन्वेस्ट करने के तरीके अलग होते हैं। समय अवधि अलग होती है। इंडिया की बात करें तो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग एक ओपन इलेक्ट्रॉनिक लिमिट ऑर्डर बुक के माध्यम से होती है। इसका मतलब है कि खरीदारों और विक्रेताओं के ऑर्डर्स को एक्सचेंजों के ट्रेडिंग कंप्यूटरों से मेल कराये जाते हैं।

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