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किसान नेताओं ने दिया ऐसा बयान सुनकर आप भी हो जाएंगे हैरान, आप कहेंगे ये नेता हैं या बदमाश

खेती कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान अपनी ज़िद्द पर अभी भी अड़े हुए हैं। 130 दिनों को यह आंदोलन पार कर गया है। प्रदर्शन कर रहे किसान अब किसान कम और गुंडे ज़्यादा जान पड़ रहे हैं। कानूनों के विरोध में कुंडली बार्डर पर जीटी रोड जाम कर बैठे आंदोलनकारियों ने महामारी की जांच कराने से भी इनकार कर दिया है।

आंदोलनकारी किसान सुपर स्प्रेडर बन रहे हैं। प्रदेश के गृह मंत्री के निर्देेश पर संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के साथ महामारी की जांच और टीकाकरण को लेकर बैठक हुई थी। बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि धरने में शामिल कोई आंदोलनकारी जांच नहीं कराएगा। टीकाकरण को लेकर नेताओं ने कहा कि इसके लिए भी किसी पर दबाव नहीं है, जिसकी इच्छा हो, वे टीका लगवा सकते हैं।

किसान नेता डबल ढोलकी वाली बातें करते हैं। एक तरफ किसानों को भड़काते हैं तो दूसरी तरफ कहते हैं कि टीकाकरण का निर्णय किसानों का है। कुंडली बार्डर पर आंदोलनकारियों की बढ़ती भीड़ और संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए गृह मंत्री अनिल विज ने सभी से जांच और टीकाकरण की अपील की थी। बैठक के बाद चढ़ूनी ने कहा कि जांच का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि पांच माह से आंदोलन चल रहा है और अभी तक एक भी व्यक्ति संक्रमित नहीं हुआ।

किसी भी समय यह किसान आंदोलन महामारी बम्ब आंदोलन बन सकता है। एक किसान ने कहा कि यहां किसी को कोई लक्षण भी नहीं है। उन्होंने कहा कि यह कोई स्लम नहीं है, बाजार या कुंभ का मेला नहीं है। यहां रहने वाले घर बनाकर गांव-मोहल्ले की तरह रह रहे हैं। अब तक जितनी मौतें हुई हैं, किसी के पोस्टमार्टम में कोई लक्षण नहीं मिले हैं।

महामारी की दूसरी लहर ने देश में हाहाकार मचा दिया है। किसी भी राज्य में स्थिति संतोषजनक नहीं है। इस सबके बावजूद किसान अपनी बेतुकी ज़िद्द पर अड़े हैं।

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