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किसान आंदोलन में फिरसे हो रहा है ये काम, सरकार को चुनौती देने लगें हैं किसान

नए कृषि कानूनों के विरोध में धरना दे रहे किसान अपनी ज़िद्द छोड़ने को तैयार नहीं है। 150 दिन आंदोलन के होने को हैं लेकिन फिर भी यह अपनी ज़िद्द पर अड़े हैं। कानूनों के विरोध में टिकरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में एक बार फिर से पंजाब से लोगों के आने से पंडालों में भीड़ एकत्र होने लगी है। महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच इस तरह से बाहर से आकर लोगों का आंदोलनकारियों की भीड़ में शामिल होने से यहां भी खतरा बढ़ता जा रहा है।

सरकार इस आंदोलन को समाप्त करने लिए हर प्रयास कर चुकी है लेकिन कुछ देश विरोधी ताकतें इसे समाप्त नहीं होने दे रही हैं। यहां डीसी ने भी किसानों को महामारी की जांच करवाने वैक्सीन लगवाने को कहा था। पर तब भी किसान अधिकारियों को गोलमोल जवाब देकर चले गए थे।

किसानों के रूप में यह बेहरुपीये बैठे हैं इस बात का प्रमाण यह लोग बार – बार दे रहे हैं। किसान देश का सोचता है न कि देश को घाव देता है। टिकरी बाॅर्डर व नया गांव स्थिति चल रहे आंदोलन में भीड़ बढ़ने से व पंडालों के दोनों तरफ बढ़ती भीड़, लगातार लोगों की आवाजाही और महामारी से बचाव के किसी भी नियमों का पालन नहीं होने के कारण आंदोलन स्थल पर संक्रमण तेजी से फैलने का खतरा मंडराने लगा है।

प्रदर्शन कर रहे किसान अब किसान कम और गुंडे ज़्यादा जान पड़ रहे हैं। गेहूं की फसल कटाई के बाद एक बार फिर से आंदोलनकारी बॉर्डर पर जुटने लगे हैं। नया गांव में आंदोलन स्थल पर पहले से ही पांच-सात हजार लोग मौजद है व अब करीब पांच हजार के करीब और किसान व उनके परिवार पहुंचे थे। जिनमें से कुछ वापस भी गए हैं।

लगातार बढ़ती संख्या ने सरकार को चुनौती देने का काम किया है। यह चुनौती देश को घाव देने वाली है। महामारी अपना रंग दिखा रही है। हर तरफ स्थिति डरावनी बनी हुई है।

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