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होम आइसोलेशन वाले मरीजों की सबसे बड़ी दिक्कत का हुआ इलाज ,इकोग्रीन ने उठाया बीड़ा

अब महामारी बढ़ती ही जा रही हैं। इस महामारी का कोई रोक नहीं है।अब लोग अस्पतालों में अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। वही इस महामारी के चलते रोज लोग अपना दम तोड़ रहे हैं।

महामारी अब जगह जगह फैल चुकी है। लोग अब घरों में होम क्वॉरेंटाइन हो रहे हैं। जिन्हें अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही वह अपने घरों में होम क्वॉरेंटाइन हो रहे है। होम आइसोलेशन में होने से वह अपना काम खुद ही कर रहे हैं।

परिवार से दूर अकेले एक कमरे में अपना समय बिता रहे हैं। नगर निगम द्वारा एक मुहिम शुरू कर दी गई है। उन्होंने नगर निगम द्वारा इस महामारी से पीड़ित जितने भी लोग होम क्वॉरेंटाइन है ,उन सभी का कूड़ा अब इको ग्रीन वाले के द्वारा उठाया जाएगा।

महामारी का कचरा उठाने के वाहन शुरू करा दिए गए हैं। यह वाहन वार्ड 1 से लेकर 13 , वार्ड 14 से 21 ,वेद 22 से लेकर 30 और वार्ड 31 से 40 के एक एक वाहन कूड़ा उठाने के लिए जाएंगे। इनकी जरूरत इस समय जिले के हर कोने में रहने वाले होम आइसोलेशन वाले मरीजों को पड़ रही है। इस मुहिम से उन मरीजों को मा उनके परिजनों को काफी सुविधा मिलेगी। जैसे-जैसे यह महामारी फैलती जा रही है। वैसे-वैसे होम क्वॉरेंटाइन की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

वाहन की संख्या को अगर बढ़ाने की जरूरत होगी तो और भी बढ़ाया जाएगा। लोगों को परेशानी ना हो इसलिए यह वाहन केवल कोविद कचरा ही उठाएंगे। रोजाना सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक कूड़ा उठा रही हैं । वाहन के पीछे पीले रंग की पॉली बाग लटकाया जाएगा। जो हर गली गली हर एरिया में जाएगी कचरे को उठाएगी ।

पीले रंग के पॉली बाग में वह हर घर के आगे रुकेगी उस घर से एक स्वस्थ व्यक्ति आए। हाथों में दस्ताने, मास्क, सैनिटाइजर और पीले रंग की पॉलिथीन में प्लेट या अन्य कोई भी सामान हो उसको डाल दें । इस सुविधा से बहुत लोगों को सहायता मिलेगी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। जिस जिस एरिया में यह वाहन ना आए तो वह फोन कर उनको अवगत करवा सकते है।

उन्होंने अपना फोन नंबर भी सबके साथ शेयर किया। जोकि 18000 1025 953 इस पर फोन कर के आप सूचित कर सकते हैं ,कि वह आपके क्षेत्र में वह आपके जगह पर आकर उस कचरे को उठा लिया है या नही इस मुहिम से होम आइसोलेशन पर रहने वाले मरीजों के साथ-साथ उनके घर में पहले वाले परिजनों को भी काफी सुविधा होगी। क्योंकि उनको होम आइसोलेशन वाले मरीज का कचरा फेंकने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था।

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