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महामारी की रेलवे पर मार : जहां रोज़ाना होते थे 10 लाख टिकट बुक, अब इतने कम पर आ गया आकड़ा

महामारी की मार आम आदमी पर ही नहीं बल्कि बड़े – बड़े उद्योगों से लेकर सरकार पर भी पड़ रही है। महामारी ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया है। महामारी के बढ़ते प्रकोप को कम करने के लिए किसी राज्य ने लाकडाउन तो किसी ने कोरोना कर्फ्यू लगाया, लेकिन ट्रेनों के संचालन पर रोक नहीं है। फिर भी लोगों ने यात्रा से परहेज कर लिया है।

महामारी की दूसरी लहर इस समय अपना कहर दिखा रही है। रेलवे से लेकर बसों तक यात्रियों की संख्या कम हुई है। इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कारपोरेशन की वेबसाइट पर रोजाना जहां दस लाख टिकट बुक होना शुरू हो गया था, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर करीब साढ़े चार लाख तक रह गया है। इसमें से भी करीब 35 फीसद यात्री टिकटों को रद करा रहे हैं।

देश के हर राज्य में इस समय मामलों में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। स्थिति की गंभीरता बहुत कुछ कह रही है। रेलवे की तरह रेलवे स्टेशन पर पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम का भी यही हाल है। महामारी की चपेट में आए लोको पायलट और गार्ड के चलते भी ट्रेनों को रद किया गया और जिन रूटों पर ट्रेनें खाली जा रही हैं उनको भी रद कर दिया गया। देश भर में ढाई सौ से अधिक ट्रेनों को रद किया जा चुका है।

काफी समय बाद ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ था लेकिन अब स्तिथि काफी गंभीर हो चली है। फरवरी और मार्च में आइआरसीटीसी की वेबसाइट पर आठ से दस लाख टिकट रोजाना बुक हो रहा था। इन में से 15 से 20 फीसद टिकट रद हो जाते थे। अप्रैल में टिकट बुकिंग का ग्राफ गिरना शुरू हो गया, जो मई में अब साढ़े चार लाख तक ही रह गया है। इन टिकटों पर सफर करने वाले दो या तीन यात्री हैं, जबकि पहले यह आंकड़ा अधिक था।

इस समय हरियाणा समेत देश के सभी राज्यों में महामारी ने अपनी पकड़ काफी मजबूत बना ली है। हर दिन मामलों में इज़ाफ़ा हो रहा है। महामारी से हाहाकार मचा हुआ है।

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