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शमशान में कुछ, दस्तावेजों में कुछ हकीकत में मरने वालों की संख्या सच या झूठ

काफी दिनों से यह बात चर्चा का विषय बनी हुई है कि श्मशान घाट में पहुंचने वाले शवों की संख्या और स्वास्थ्य विभाग द्वारा सार्वजनिक जाने वाली सूची में अंकित की गई शवों की संख्या में काफी अंतर देखने को मिल रहा है।

इस बात की हकीकत जानने के लिए प्रदेश के 22 जिलों के मुख्य श्मशान में अप्रैल माह में हुए अंतिम संस्कारों के आंकड़े जुटाए गए तो वास्तव में हकीकत सच से बहुत ज्यादा परे थी।

दरअसल सरकारी रिपोर्ट के अनुसार अगर बात की जाए तो अप्रैल माह में संक्रमण से मृत्यु को प्राप्त करने वालों की संख्या कुल 1225 दर्ज की गई है। वहीं यद्यपि श्मशानों में अंतिम संस्कार करने वाली संस्थाओं के मुताबिक पूरे महीने में 3814 लोगों का कोविड प्रोटोकोल के तहत अंतिम संस्कार किया गया है। यह संख्या सरकारी रिकॉर्ड से करीब तीन गुना अधिक है।

आपको बताते चलें कि गुरुग्राम में 1350 लोगों का कोविड प्रोटोकोल के तहत अंतिम संस्कार हुआ, जबकि वहां रिकॉर्ड में अप्रैल में सिर्फ 112 मौतें हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार हरियाणा में कोरोना संक्रमण से पिछले एक साल के दौरान करीब 4882 मौतें हुई हैं,

जबकि श्मशानों में सिर्फ अप्रैल में ही 3814 अंतिम संस्कार हो गए। हालांकि, एक तथ्य यह भी है कि अप्रैल में दम तोड़ने वाले मरीजों में एक बड़ा आंकड़ा दिल्ली और यूपी से आने वालों का भी शामिल है।

अम्बाला सिटी के गोबिंदपुरी रामबाग श्मशान घाट में कोविड प्रोटोकॉल से संस्कार के लिए जगह कम पड़ गई तो जगह बनानी पड़ी। चिताएं जलाने के लिए शेड नहीं था। 29 अप्रैल शाम को बारिश की वजह से कई चिताएं बुझ गईं और शव अधजले रह गए। उसके बाद शेड बनाया जा रहा है। श्मशान घाट में अस्थियां रखने के कमरे में खूंटियां कम पड़ी गईं तो इसके लिए नया कमरा तैयार करना पड़ा।

कैथल में शांति वन श्मशान घाट के पंडित यशपाल ने बताया कि अप्रैल माह में कोरोना से मौताें की संख्या बढ़ने के कारण श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए कुंड की संख्या बढ़ानी पड़ी। पहले मौजूद 11 कुंड में से 3 कोविड मरीजों के लिए अधिकृत किए गए थे। लेकिन मौतें बढ़ने पर कोविड मृतकों के लिए 5 कुंड करने पड़े।

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