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कभी ब्‍लैक में सिनेमा के टिकट बेचता था छोटा राजन, ‘वास्‍तव’ में ऐसी थी ‘कंपनी’ की कहानी

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अंडरवर्ल्ड का राज मुंबई में कहीं न कहीं अभी भी जीवित है। इसके पीछे दाऊद इब्राहिम का हाथ अभी भी बताया जाता है। दाऊद अपने ज़माने से लेकर अभी तक का मोस्ट वांटेड डॉन है। राजेंद्र एस निखल्जे यानी छोटा राजन मुंबई अंडरवर्ल्‍ड की दुनिया में दाऊद इब्राहिम का वह सिक्‍का, जो कभी खोटा साबित नहीं हुआ। शुक्रवार को ऐसी खबरें आईं कि संक्रमण के कारण छोटा राजन की मौत हो गई, हालांकि बाद में वह खबर अफवाह साबित हुई।

छोटा राजन आज भी दहशत का दूसरा नाम कहा जाता है। दाऊद का राइट हैंड इसे कहा जाता था। छोटा राजन दिल्‍ली की तिहाड़ जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। फिलहाल एम्‍स में भर्ती है। छोटा राजन की जिंदगी ने वैसे तो कई करवटें लीं। वैसे अपराध की दुनिया में आने से पहले छोटा राजन सिनेमाघरों के बाहर ब्लैक में टिकटें बेचता था।

कभी ब्‍लैक में सिनेमा के टिकट बेचता था छोटा राजन, 'वास्‍तव' में ऐसी थी 'कंपनी' की कहानी

छोटे से क्रिमिनल काम से छोटा राजन अंडरवर्ल्ड तक पहुंच गया। छोटा राजन दाऊद का सबसे ख़ास इंसान हुआ करता था। छोटा राजन 1982 में गैंगस्टर राजन महादेव नायर उर्फ ​​बड़ा राजन के लिए काम किया करता था। बड़ा राजन को गोली लगने के बाद मौत हो गई जिसके बाद छोटा राजन ने गिरोह को संभाला। सिनेमाई पर्दे पर छोटा राजन की कहानी को कई बार दिखाया गया। उसकी जिंदगी की कहानी से प्रेरित कई किरदार फिल्‍मी पर्दे पर गढ़े गए। फिर चाहे वह संजय दत्त की ‘वास्‍तव’ हो या विवेक ओबेरॉय-अजय देवगन की ‘कंपनी’

कभी ब्‍लैक में सिनेमा के टिकट बेचता था छोटा राजन, 'वास्‍तव' में ऐसी थी 'कंपनी' की कहानी

हर अवैध काम छोटा राजन ने किया है। सोना तस्करी से लेकर शराब तस्करी सबकुछ उसने कर के छोड़ दिए हैं। 1984 में छोटा राजन ने दाऊद इब्राहिम के लिए काम करना शुरू किया, उस समय वह एक सोने का तस्कर था। 1998 में, छोटा राजन और उसके गिरोह के सदस्यों ने मिर्जा दिलशाद बेग की हत्या कर दी, जो एक नेपाली सांसद था, जिसके दाऊद इब्राहिम के साथ कथित संबंध थे।

कभी ब्‍लैक में सिनेमा के टिकट बेचता था छोटा राजन, 'वास्‍तव' में ऐसी थी 'कंपनी' की कहानी

छोटा शकील, छोटा राजन, दाऊद, करीम लाला से लेकर और भी बड़े – बड़े नाम यह एक समय पूरे महाराष्ट्र पर राज किया करते थे। 1993 मुंबई बम धमाके में सबसे काला चेहरा दाऊद और छोटा राजन का ही था। राजन 1993 के सीरियल धमाकों से दाऊद से अलग होने के बहाने अपने गिरोह को बनाने के लिए इस्तेमाल किया, जिसका मुख्य कारण था कि गिरोह में उसकी प्रासंगिकता छोटा शकील के कारण कम हो गई थी।

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