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नारद जयंती: जानिए दुनिया के पहले ‘पत्रकार’ की कहानी, ऐसे हुई थी इनकी उत्पत्ति

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जब आपने देवर्षि नारद ऊपर पढ़ा होगा तब आपके ज़हन और कानों में “नारायण” “नारायण” यह ज़रूर सुनाई दिया होगा। देवर्षि नारद, एक ब्रह्मचारी हैं जिन्हें नारद मुनि कहा जाता है, वह भगवान ब्रह्मा और ज्ञान की देवी सरस्वती के पुत्र हैं। कहा जाता है कि उनका जन्म ज्येष्ठ, कृष्ण पक्ष के हिंदू महीने में प्रतिपदा तिथि में हुआ था। हालांकि, अमावसंत कैलेंडर का पालन करने वाले भक्त उनकी जयंती प्रतिपदा तिथि, कृष्ण पक्ष वैशाख को मनाते हैं।

नारद मुनि के प्रति देश के कई हिस्सों में लोगों की गहरी आस्था है। महर्षि नारद को ब्रह्मांड के प्रथम पत्रकार के रूप में जाना जाता है आदि पत्रकार महर्षि नारद ने पाताल, पृथ्वी एवं आकाश तीनों लोक में पत्रकार की भूमिका को बखूबी निभाया।

नारद जयंती: जानिए दुनिया के पहले 'पत्रकार' की कहानी, ऐसे हुई थी इनकी उत्पत्ति

नारद मुनि नारायण के परम भक्त व देवताओं के बीच संवाद तंत्र थे, वह हिन्दू शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक माने गए हैं। ज्येष्ठ माह पूर्णिमांत कैलेंडर के अनुसार शुरू होता है, और इसलिए कई भक्त आज नारद जयंती मना रहे हैं। ब्रह्मांड के पहले पत्रकार कहे जाने वाले देवर्षि नारद की जयंती आज को मनाई जा रही है। श्रद्धालु विधि-विधान से देवर्षि नारद की पूजन-अर्चन कर उन्हें प्रसन्न करेंगे।

नारद जयंती: जानिए दुनिया के पहले 'पत्रकार' की कहानी, ऐसे हुई थी इनकी उत्पत्ति

देश में कई मंदिर नारद मुनि को समर्पित हैं। उनके भक्त आज पूजा करके उनकी जयंती मनाएगें। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ माह की प्रतिपदा के दिन भगवान विष्णु भक्त नारद का जन्म हुआ था। ऐसे में इस दिन नारद जयंती मनाई जाती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, संगीत और वीणा के जनक देव ऋषि नारद का जन्म सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी के कंठ से हुआ था। इन्हें तीनों लोकों में वायु मार्ग द्वारा विचरण करने का वरदान प्राप्त है।

नारद जयंती: जानिए दुनिया के पहले 'पत्रकार' की कहानी, ऐसे हुई थी इनकी उत्पत्ति

आज के दिन कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। आज के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने के बाद देवर्षि नारद की पूजा आराधना करनी चाहिए। नारद जयंती के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प करें, पूजा-अर्चना करें।

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