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कोरोनावायरस के इलाज के लिए अब निजी अस्पतालों की फीस तय

कोरोना मरीजों के महंगे उपचार के आरोपों के बाद निजी अस्पतालों ने अपनी फीस को एक सीमा तक तय कर दी है। अब मरीजों को तय हुवी फीस से ज्यादा फीस नहीं देनी पड़ेगी। एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) ने 21 राज्यों के अस्पतालों से चर्चा करने के बाद कोविड उपचार राशि को तय किया गया है | जिसके तहत प्रतिदिन अधिकतम 35 हजार रुपये की फीस शामिल है। कोविड उपचार को चार चरण में बांटते हुए फीस को तय किया है।

अगर कोई मरीज़ सामान्य वार्ड में भर्ती होता है थो उसको 15 हजार से ज्यादा नही लिया जायेगा |
अगर कोई मरीज़ ओक्ससिजंन के साथ वार्ड में हो थो उससे 20 और आइसोलेशन में हो थो उससे 25 हजार रुपये अधिकतम लिया जायेगा | अगर मरीज़ आइसोलेशन आईसीयू में है और उसे वेंटीलेटर की स्थिति है थो उसको 35 हजार रुपये अधिकतम देना होगा | इनमें इम्युनोग्लोबुलिन, टोसिलिजुमाब, प्लाज्मा थैरेपी जैसी दवाओं का खर्च शामिल नहीं है जिससे मरीजों को थोड़ी राहत मिलेगी |

एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अलेक्जेंडर थॉमस ने बताया कि कोविड मरीजों की वृद्घि के अलावा निजी अस्पतालों में उपचार लागत में पारदर्शिता न होने से जुड़ी शिकायतें मिल रही थीं। ऐसे में यह विचार आया है कि कोविड महामारी के इस दौर में अस्पतालों में फीस एक जैसी तय होनी चाहिए। इसीलिए एसोसिएशन से जुड़े देश भर के सभी निजी अस्पतालों के संचालकों की आपसी रजामंदी के बाद फीस का निर्धारण किया गया है।

कोविद-19 के केस देश में हर दिन बड रहे है जिसके चलते हस्पताल में बेड की कमी होती दिख रही है | प्राइवेट हस्पताल की फीस ज्यादा होने के कारन लोग सरकारी और छोटे हस्पताल में इलाज कराने के लिए मजबुर है | देश में कोरोना के आकड़े अब 2 लाख के पार चले गए है |

Written by- Prashant K Sonni

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