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मुश्किलें हज़ारों थी सामने इन्होनें नहीं मानी हार, आज बन गए हैं IAS अफसर सब कर रहे सलाम

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हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और अपने लक्ष्य तक पहुंचते हैं। ये लोग अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बहुत कोशिश करते हैं और सभी बुरी स्थितियो सामना करते है। यूपीएससी की परीक्षा पास करने का कई लोगों का सफर काफी कठिन होता है। ऐसे ही एक कहानी महाराष्ट्र के छोटे से गांव से निकले निकेतन बंसीलाल कदम की है, जिन्होंने यूपीएससी में सफलता प्राप्त करने के लिए लंबा संघर्ष किया।

इंसान की जिंदगी काँटों का सफर है, हौसला इसकी पहचान है। निकेतन की शुरुआती शिक्षा मराठी मीडियम से हुई थी उनकी अंग्रेजी कमजोर थी। जिसके कारण कॉलेज में उनका मजाक भी बनाया गया। सब को दरकिनार करके उन्होंने यूपीएससी में जाने का मन बनाया और तैयारी शुरू कर दी। पहले दो बार में उन्हें असफलता हाथ लगी, लेकिन तीसरी बार में उन्हें सफलता मिल गई। इस तरह उनका यूपीएससी परीक्षा पास करने का सपना साकार हो गया।

मुश्किलें हज़ारों थी सामने इन्होनें नहीं मानी हार, आज बन गए हैं IAS अफसर सब कर रहे सलाम

इसी बात को चरितार्थ करते हैं निकेतन कि हौसला होना चाहिए जिंदगी तो कहीं भी शुरू हो सकती है। निकेतन का जन्म महाराष्ट्र के नासिक जिले के गांव में हुआ था। उनके पिता किसान थे और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। उनकी शुरुआती शिक्षा मराठी मीडियम से हुई। इसके बाद उन्होंने डिप्लोमा और उसके बाद बीटेक करने के लिए एक कॉलेज में एडमिशन लिया। इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा में जाने का मन बनाया।

मुश्किलें हज़ारों थी सामने इन्होनें नहीं मानी हार, आज बन गए हैं IAS अफसर सब कर रहे सलाम

परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इस वजह से उन्होंने बीटेक के बाद एक कंपनी में नौकरी की। इस दौरान उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। आईएएस बनना हर किसी का सपना होता है। लेकिन कई लोगों का यह सपना, सपना बनकर ही रह जाता है। तो कई लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी मेहनत से आईएएस बनते हैं और मिसाल कायम करते हैं।

मुश्किलें हज़ारों थी सामने इन्होनें नहीं मानी हार, आज बन गए हैं IAS अफसर सब कर रहे सलाम

आपको एकाग्रता के साथ लक्ष्य तक पहुंचना होता है। यह मायने नहीं रखता कि आप कहां से आते हैं। आपका हौसला बुलंद होना चाहिए मुकाम तो मिल ही जाता है। इंसान को कभी हार नहीं माननी चाहिए।

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