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लॉकडाउन में हुए बेरोज़गार तो नहीं मानी हार, शुरू की खेती-बाड़ी हुई अच्छी-खासी कमाई

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महामारी के कारण लगे लॉकडाउन में हर किसी ने बहुत कुछ साहा है। किसी की आर्थिक स्थिति ख़राब हुई तो किसी का काम धंधा चौपट हुआ। बुरा समय किसी की भी ज़िन्दगी में आ सकता है। लेकिन उस मुश्किल समय में कैसे हिम्मत से काम लेना है और उम्मीद नहीं छोड़नी, इसका सन्देश देती है राजस्थान के बीकानेर शहर के विजय शर्मा की कहानी।

बुरे समय की सबसे ख़ास बात यही होती है कि वह निकल जाता है। इस बुरे समय में हमें हार नहीं माननी चाहिए। पेशे से स्विमिंग कोच विजय शर्मा ने पिछले साल बुरा समय देखा। लॉकडाउन के बाद से जिस स्विमिंग पूल में वो कोचिंग देते थे, वो बंद हो गया। दो बच्चे के पिता विजय के लिए आमदनी का यही ज़रिया था।

लॉकडाउन में हुए बेरोज़गार तो नहीं मानी हार, शुरू की खेती-बाड़ी हुई अच्छी-खासी कमाई

विजय की हालत काफी खस्ता हो गयी थी। बच्चों को खाना नहीं मिल रहा था। हालात मुश्किल थे और उन्हें नहीं पता था कि उन्हें घर चलाने के लिए अब क्या करना चाहिए। घर में खाली बैठे विजय ने समय काटने के लिए अपने गार्डन में दो फूल के पौधे लगाए। कुछ दिनों में ये फूल बड़े हुए और इसके साथ ही विजय के दिमाग में एक आईडिया ने जन्म लिया। उन्होंने अपनी गार्डनिंग को विस्तार देने का मन बना लिया।

लॉकडाउन में हुए बेरोज़गार तो नहीं मानी हार, शुरू की खेती-बाड़ी हुई अच्छी-खासी कमाई

कुछ बड़ा करने के लिए आपके हौसले भी बड़े होने चाहिए। विजय की आमदनी बहुत ज़्यादा नहीं हुई है। पिछले 6 महीनों में उन्होंने सिर्फ़ 75 हज़ार रुपये कमाए, लेकिन उन्हें अपनी मेहनत पर पूरा यकीन है। वो आशा भरे लहज़े में कहते हैं, “ये मेरा फ़र्स्ट एक्सपीरियंस था, अभी सब सीखा है, मुझे यकीन है धीरे-धीरे ये बढ़ेगा।

लॉकडाउन में हुए बेरोज़गार तो नहीं मानी हार, शुरू की खेती-बाड़ी हुई अच्छी-खासी कमाई

लगन से की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। समय बदलते ज़रा भी वक्त नहीं लगता है। आपको बुरे वक्त में बस कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। मेहनत का फल और समस्या का हल देर से ही सही पर मिलता ज़रूर है।

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