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अपने परिश्रम से फरीदाबाद के सिद्धार्थ सांगवान बने लेफ्टिनेंट, आईआईटी नहीं सेना को दी प्राथमिकता

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“राह संघर्ष की हो जो चलता हैं, वो संसार को बदलता हैं, जिसने रातो से जीती से जंग, सूर्य बनकर वही निकलता हैं” यह कथन तो हम सबने ही सुना हैं लेकिन इस कथन को सुनकर अपने जीवन में अपना कर बहुत ही कम लोग आगे बढ़ते हैं और जीवन का मुकाम हासिल करते हैं।

आज हम आपको एक ऐसे ही शख्श के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके बारे में पढ़कर आपको लगेगा की यह कथन इसी शख्श के लिए ही बना हैं या इस कथन का सही अर्थ इन्होंने ही सार्थक किया हैं। 

अपने परिश्रम से फरीदाबाद के सिद्धार्थ सांगवान बने लेफ्टिनेंट, आईआईटी नहीं सेना को दी प्राथमिकता

आज हम आपको फरीदाबाद के सिद्धार्थ सांगवान के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से यह सच कर दिखाया की अगर हौसले बुलंद हो और सोच पक्की हो तो आप जीवन में कुछ भी हासिल क्र सकते हो।

सिद्धार्थ सांगवान ने अपने 4 वर्ष के कठोर परिश्रम के बाद आईएमए देहरादून से पासिंग आउट परेड कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए हैं।आपको बता दे की सिद्धार्थ ने पप्रथम  प्रयास में ही अखिल भारतीय स्तर पर 78वां स्थान प्राप्त कर  परीक्षा पास की।

अपने परिश्रम से फरीदाबाद के सिद्धार्थ सांगवान बने लेफ्टिनेंट, आईआईटी नहीं सेना को दी प्राथमिकता

उनका चयन बिट्स पिलानी व आईआईटी में हो गया था लेकिन इसके बावजूद भी अपने देश को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने भारत माता की सेवा करने को महत्व दिया और भारतीय सेना में सेवा करने को अहमियत देते हुए सेना में लेफ्टिनेंट के पद को स्वीकार किया। 

सिद्धार्थ के पिता डॉ अनूप सांगवान फरीदाबाद के राजकीय कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं, और माँ अलका सांगवान जूनियर लेक्चरार हैं। जबकि बड़े भाई एमएनसी में सीनियर मैनेजर के पद पर नियुक्त हैं। सिद्धार्थ का कहना हैं घर के इसी परिवेश ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया हैं।

अपने परिश्रम से फरीदाबाद के सिद्धार्थ सांगवान बने लेफ्टिनेंट, आईआईटी नहीं सेना को दी प्राथमिकता

उन्होंने अपने सफलता के बारे में बताते हुए सारा  श्रेय अपने माता- पिता, शिक्षकों एनडीए खड़कवासला व आईएमए डश्रडून के कर्मचारियों एवं अधिकारियो को दिया। उन्होंने श्रेय देता हुआ कहा इन लोगो के ही सहयोग से ही वह इस मुकाम को हासिल कर पाए हैं, इन लोगो के साथ के बिना यह मुमकिन न था। 

इसके साथ ही सिद्दार्थ ने युवाओं से यह आवाहन भी किया हैं की खाली बैठे रहने से सिर्फ समय बर्बाद होता हैं और जीवन में कुछ हासिल नहीं होता हैं। अगर आपको भी सिद्धार्थ की तरह जीवन में आगे बनना हैं और अपने सपनों को साकार करना हैं तो खाली बैठे से कुछ नहीं होगा, आपको भी अपने हौसलों को बुलंद कर और कठोर परिश्रम करना होगा। क्युकी जीवन में बिना परिश्रम के कुछ भी नहीं मिलता।

Written by : Ankita Gusain

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