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फरीदाबाद में स्कूल खोलें जानें को लेकर आया बड़ा फैसला, जिला स्तरीय बैठक में लिया गया यह निर्णय

जिला शिक्षा अधिकारी सतिन्दर कौर वर्मा की अध्यक्षता में स्कूलों को खोले जाने को लेकर बनाई गई जिला स्तरीय कमेटी की बैठक हुई। बैठक का उद्देश्य था कि इस महामारी के दौर में किस प्रकार स्कूलों को खोला जा सकता है और क्या प्रयास इसके लिए किए जा सकते हैं।

बैठक में कोरोना वायरस संक्रमण के फैलाव के बीच स्कूलों को खोले जाने संबंधी अभिभावकों की राय व सुझाव जाने गए। बैठक में मौजूद प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि ऐसे बिगड़े हालात में अगर स्कूल खोले गए और बच्चों को विद्यालय भेजा गया तो संक्रमण फैलाव पर काबू पाना और भी मुश्किल हो जाएगा।

जिला के अधिकांश सरकारी और निजी विद्यालयों के अंदर प्रत्येक बच्चे के लिए अलग से शौचालयों का प्रबंध कर पाना मुश्किल है और सामुदायिक दूरी के नियमों का अनुपालन भी संभव नहीं है। बैठक में मौजूद शिक्षाविदों ने भी सुझाव दिया गया कि अभी शैक्षणिक सत्र शुरू हुए केवल दो माह ही बीते हैं।

इसलिए स्कूलों को खोलकर बच्चों की एक ही जगह पर शैक्षणिक गतिविधियां कराने की जल्दबाजी करना सही नहीं है। बैठक में हरियाणा व सीबीएसई बोर्ड से संबंद्ध निजी स्कूलों के प्राचार्यों ने भी राय रखी।

बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियो ने सुझाव सांझे करते हुए कहा कि  जब तक कोरोना की रोकथाम का इलाज इजाद नहीं होता तब तक सरकार व विभाग जबरदस्ती स्कूलों को न खुलवाएं।

उन्होंने कहा कि जब तक कोरोना का खतरा टल नहीं जाता। तब तक बच्चों की जान पर कोई जोखिम न उठाया जाए।   बैठक में शिक्षा सत्र 2020-21 को शिक्षा के लिए शून्य वर्ष घोषित किए जाने की मांग बारे भी सुझाव सांझा किया गया।

सरकार के निर्देश पर जिला स्तरीय कमेटी ने अभिभावकों, बच्चों व अन्य संगठनों से स्कूल खुलने पर विस्तृत चर्चा की है और एक मत से यही निष्कर्ष निकला है कि फिलहाल स्कूल नहीं खोले जाएं, क्योंकि कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है, जिससे बच्चों की जान पर भी भारी जोखिम होगा। चर्चा की रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी ।

,इस बैठक में जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशि अहलावत के अलावा उप जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती अनिता शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी डॉ इन्दु गुप्ता ,खंड शिक्षा अधिकारी बल्लबगढ़ श्री पवन कुमार और  अभिभावकों, नौंवी से बारहवीं के बच्चों, प्राइवेट व सरकारी स्कूल के प्राचार्यों के सहित  अन्य जनसंगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

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