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रामप्रकाश उर्फ रामी को फरीदाबाद DCCB के चेयरमैन पद के लिए चयनित


हाल ही में जिला सहकारी केंद्र बैंक के चुनाव संपन्न हुए इन चुनाव मे रामप्रकाश उर्फ रामी को हरियाणा स्थित फरीदाबाद केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में चुना गया है। चुनाव डिप्टी रजिस्ट्रार सहकारी समिति सतीश कुमार रोहिल्ला के नेतृत्व में किया गया था।

बैंक की फरीदाबाद में 10 और पलवल जिले में 23 शाखाएँ हैं।रामप्रकाश ने राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और पलवल के विधायक दीपक मंगला को उनके चयन के लिए धन्यवाद दिया है।

इससे पहले, रामी साल 2000 से 2005 तक अमरौली गांव के सरपंच थे और 2005 से 2010 तक हसनपुर ब्लॉक के अध्यक्ष भी रहे।

सहकारी बैंक क्या हैं


सहकारी बैंक छोटे वित्तीय संस्थानों को संदर्भित करता है जो शहरी और गैर-शहरी दोनों क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों को ऋण प्रदान करते हैं।सहकारी बैंक आमतौर पर अपने सदस्यों को विभिन्न प्रकार की बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं जैसे कि ऋण देना, धन जमा करना और बैंक खाता आदि।


सहकारी बैंक अपने संगठन, उद्देश्यों, मूल्यों और शासन के आधार पर वाणिज्यिक बैंकों से भिन्न होते हैं।यह उल्लेखनीय है कि सहकारी बैंक का प्राथमिक लक्ष्य अधिकतम लाभ अर्जित करना नहीं है, बल्कि अपने सदस्यों को सर्वोत्तम उत्पाद और सेवाएं प्रदान करना है।


सहकारी बैंकों का स्वामित्व और नियंत्रण सदस्यों द्वारा किया जाता है, जो लोकतांत्रिक रूप से निदेशक मंडल का चुनाव करते हैं।
वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित होते हैं और बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के साथ-साथ बैंकिंग कानून अधिनियम, 1965 के अंतर्गत आते हैं।
सहकारी बैंक सहकारी समितियों अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं।


सहकारी बैंकों का उद्देश्य


ग्रामीण वित्तपोषण और सूक्ष्म वित्तपोषण के लिए।
आम नागरिकों को बिचौलियों और साहूकारों के शोषण से मुक्त करने के लिए।
देश के किसानों और गरीबों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए, उन्हें सस्ती दर पर ऋण प्रदान करना।


ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों और किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करना।ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्व-रोजगार गतिविधियों में लगे लघु उद्योगों और लोगों को व्यक्तिगत वित्तीय सेवाएं प्रदान करना।


सहकारी बैंकों का महत्व


सहकारी बैंकों ने गांवों और कस्बों में आम लोगों को बैंकिंग से जोड़कर देश की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
देश की सहकारी ऋण संरचना का मुख्य उद्देश्य आम जनता को पारंपरिक क्रेडिट स्रोतों का बेहतर विकल्प प्रदान करना है

सहकारी बैंकों ने इस उद्देश्य को प्राप्त करने में बेहतर प्रदर्शन किया है। सहकारी बैंक ग्रामीण ऋण और कम शिक्षित आबादी को पारंपरिक ऋणदाताओं के चंगुल से बचाते हैं।


यह उल्लेखनीय है कि देश में पारंपरिक उधारदाताओं ने दशकों तक अपना दबदबा बनाए रखा है और वे अब भी गरीब लोगों पर ऋण की उच्च दर का ब्याज लगाकर उनका शोषण कर रहे हैं।


सहकारी बैंक अपने ग्राहकों को अपेक्षाकृत सस्ती ब्याज दर पर ऋण प्रदान करते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य लाभ कमाने के बजाय अपने सदस्यों को अच्छी सेवाएं प्रदान करना है।


सहकारी बैंकों ने भी किसानों के बीच बचत की आदतों को विकसित करके बचत और निवेश को प्रोत्साहित किया है।

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