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नगर निगम ने किया ग्राम अनखीर के साथ हुआ भारी कपट, समस्या अब तक ज्यों की त्यों

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जुलाई:- फरीदाबाद नगर निगम के वार्ड नंबर -18 में पड़ने वाला ग्राम अनखीर इन दिनों सीवरेज सिस्टम के मामले में प्रशासन से स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहा है और साथ ही यह बात भी सामने आ रही है कि जिला प्रशासन ने तत्कालीन उपायुक्त चंद्रशेखर के समय सन 2016 में पूरे जिले को विशेषकर शहरी क्षेत्र को खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) का दावा करते हुए ओपन डिफेकेशन फ्री (ओडीएफ) का सर्टिफिकेट केंद्र सरकार से झपट लिया था ।

सदियों पूर्व बसे इस गांव में सन -1978 तक पंचायती राज सिस्टम लागू था लेकिन उस वक्त यह सिस्टम खत्म करके सरकार ने इस गांव को तत्कालीन फरीदाबाद मिश्रित प्रशासन में शामिल कर लिया जो कि गांव की पंचायती जमीन का भी मालिक बन बैठा । इसके पश्चात गांव में पेयजल आपूर्ति की एक ट्यूबवेल गांव के बीचो-बीच स्थित पुराने कुएं में लगा दी गई और नालियां भी सन 1981 तक बनाई गई,

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लेकिन आज तक 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी इन नालियों की रिपेयरिंग नहीं हुई है और इन टूटी-फूटी नालियों की वजह से गंदा पानी गांव की मुख्य सड़क तथा गलियों में फैला रहता है । सन 1994 में जैसे ही फरीदाबाद नगर निगम ने अपनी शक्ल अख्तियार की तो इस गांव को उस समय वार्ड नंबर- 13 में शामिल किया गया जोकि धीरे-धीरे वार्ड नंबर- 18 में आ गया ।

इस दौरान जून 1999 में मेवला महाराजपुर क्षेत्र के तत्कालीन विधायक और हरियाणा सरकार के परिवहन मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने यहां पर हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ग्राम विकास निधि योजना के तहत सीवरेज सिस्टम डालने की योजना का शिलान्यास किया और यह आधारशिला पत्थर आज तक स्कूल की दीवार पर एक शिलालेख के रूप में शोभायमान है। यह कार्य धीरे-धीरे बढ़ता गया और जो शुरू में 10 लाख रुपये की लागत की परियोजना थी

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वह लगभग एक करोड़ रुपए की लागत तक पहुंच गई और पूरे गांव की गलियों में सन् 2005 तक सीवरेज लाइन बिछा दी गई । लेकिन 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक इस सीवरेज लाइन को सही तरीके से सामने नजदीकी सैक्टर-21डी की मेन डिस्पोजल सीवरेज लाइन से जोड़ा ही नही गया है जिसके दुष्परिणामस्वरूप ग्रामवासी या तो खुले में शौच जाने को मजबूर हैं या अपने घरों में छोटे-छोटे शौचालय बनाकर गंदगी को खुली नालियों में बहाने को विवश हैं ।

नगर निगम ने किया ग्राम अनखीर के साथ हुआ भारी कपट, समस्या अब तक ज्यों की त्यों

इससे साबित होता है की यह कैसा ओडीएफ सर्टिफिकेट हुआ जो जिला प्रशासन ने इस संबंध में किसी भी प्रकार का सर्वे करवाए बगैर केंद्र सरकार और देश के प्रधानमंत्री की आंखों में धूल झोंक कर तत्कालीन उपायुक्त चंद्रशेखर ने गुरुग्राम में आयोजित समारोह में देश के प्रधानमंत्री से झपट लिया। इस गांव के लोगआज तक भी खुले में ही शौच जा रहे हैं या फिर उनके अस्थाई शौचालयों से गन्दगी निकल कर नालियों में खुली बह रही है।

तो जिला प्रशासन के पास यह कैसा ओडीएफ प्रमाण-पत्र है ? जिला प्रशासन की जवाबदेही तो बनती ही है जोकि इस मामले में कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है। अब काफी परेशान होकर ग्रामवासी इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हो गए हैं।

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