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अरावली के बेजान पड़े जंगलों को अब मिल सकती है राहत,जाने कैसे ?

देशव्यापी लॉक डाउन की वजह से कई काम काज थम गए लेकिन लॉक डाउन के बाद अनलॉक 1 के दौरान अरावली की पहाड़ियों को एक सुनहरा तोहफा मिल गया।

आखिरकार प्रशासन को अरावली की सुध लेने की याद आ ही गयी। नगर निगम गुरुग्राम ने अरावली क्षेत्र के जंगल में अवैध तौर पर फेंके गये कई टन मलबे को हटाने का काम प्रारम्भ कर ही दिया है। एक सर्वे के अनुसार गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र में मलबे का ढेर दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था। जिस कारण जंगल को भारी नुकसान हो रहा था।

पर्यावरण के लिए भी यह चिंता का विषय बन चुका था। अब नगर निगम के कमिश्नर विनय प्रताप सिंह ने लाकडाउन पीरियड का फायदा उठाते हुए शहर की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चिंता को हल करने का बीड़ा उठा लिया है।

सूत्रों के मुताबिक नगर निगम ने 22 मार्च के बाद से एेसी 75 साइटों से मलबा और कूड़ा साफ कर दिया है जिनकी शिकायतें वषर 2012 से लंबित थीं। कचरे के खिलाफ यह निगम का सबसे बड़ा अभियान है, जहां इफको चौक और एनएच 48 जैसे क्षेत्रों में सफाई की गई है। उल्लेखनीय है कि 2017 के बाद से निर्माण सामग्री और कचरे की धूल ने शहर में स्मॉग को बढ़ाने में अपना योगदान दिया। प्रदूषण उच्च जोखिम की श्रेणी में रहने के कारण अधिकारियों ने कुछ दिनों के लिए निर्माण पर प्रतिबंध भी लगाया, मगर स्थिति वही रही।
साइट पर कचरा फेंकने वाले वाहनों पर एक्शन लेना शुरू किया ।

अब निगम ने साइट पर कचरा फेंकने वाले वाहनों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। आयुक्त का कहना है कि इस मामले को प्रमुख प्राथमिकता के साथ निपटाया जायेगा। इस मुद्दे से निपटने के लिए एक पेशेवर एजेंसी की सहायता भी ली। आयुक्त ने बताया कि उन्होंने एेस ट्रैक्टर और डंपर के विरुद्ध भी कार्रवाई की जो फर्जी तौर पर वाहनों पर एमसीजी लिखवाकर अवैध तौर पर कचरा फेंकते थे।
उन्होंने बताया कि हमने एनएचएआई जैसे प्राधिकरण पर भी मलबा फेंकने को लेकर कार्रवाई की।

अंततः अरावली में पसरती गंदगी के कारण जीवों का पनपना बंद हो गया है। जंगल मलबे के नीचे मर रहा है और अगर अभियान जारी रखा जाएगा तो यह जंगल के पुनरुद्धार का सबसे बड़ा कदम होगा।

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