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ओमप्रकाश चौटाला और नीतीश कुमार की मुलाकात बनी चर्चा का विषय, दोनों को ही राजनीति में एक दूसरे से कोई फायदा नहीं

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, जोकि लगातार पांच बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश के बीच हुई मुलाकात लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। चौटाला के गुरुग्राम स्थित आवास पर दोनों ने की मुलाकात हुई जहां दोनों ने भोजन भी किया।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार स्वयं उनके आवास पर पहुंचे थे। स्वाभाविक है किbभोजन के दौरान हुई पारिवारिक बातों के साथ राजनीतिक बाते तो हुई ही होंगी। लेकिन राजनीति की क्या बातें हो सकती हैं इस बात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

ओमप्रकाश चौटाला और नीतीश कुमार की मुलाकात बनी चर्चा का विषय, दोनों को ही राजनीति में एक दूसरे से कोई फायदा नहीं

क्योंकि दोनों ही इस मामले में एक दूसरे की कोई मदद नहीं कर सकते। फिर सवाल ये है कि आखिर क्यों मोदी से बैर लेकर नीतीश कुमार, चौटाला से जुड़ेंगे ? न तो बिहार में कोई जात मतदाता हैं जिन पर चौटाला प्रभाव डाल सकते हैं और न ही हरियाणा में कुर्मी है, जिससे चौटाला उनकी कोई मदद कर सकें।

टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंची भारतीय महिला टीम को प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बढ़ाई दी तथा साथ में यह बात रखने से भी नही चुके की टीम में 9 खिलाड़ी हरियाणा से हैं।

ओमप्रकाश चौटाला और नीतीश कुमार की मुलाकात बनी चर्चा का विषय, दोनों को ही राजनीति में एक दूसरे से कोई फायदा नहीं

उन्होंने प्रदेश की छोरियों की खूब प्रशंशा तो की लेकिन यह नहीं बताया कि यदि उन्होंने सात गोल न रोक होते तो उनकी टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच पाती। वहीं दूसरी ओर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने पुरुष टीम को बधाई देते हुए कहा कि मैं बहुत खुश हूं, को तीनों गोल पंजाब के खिलाड़ियों ने ही किए।

सवाल यह है की यदि अन्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने गोल किए होते तो क्या वे खुश नहीं होते ? बता दें कि जब हॉकी टीम को कोई भी स्पॉन्सर करने को तैयार नहीं थे तब ओडिसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ही थे जिन्होंने टीम को स्पॉन्सर किया। उन्होंने ही दोनों टीमों की उत्तम व्यवस्था कराई थी , जिसका परिणाम सबके सामने है। लेकिन अन्य लोगों की तरह श्रेय लेने के लिए उन्होंने शोर नहीं मचाया।

ओमप्रकाश चौटाला और नीतीश कुमार की मुलाकात बनी चर्चा का विषय, दोनों को ही राजनीति में एक दूसरे से कोई फायदा नहीं

भाजपा के पक्ष में इंटरनेट मीडिया में बैटिंग करने वालों में हेमंत सिंह फोगाट का नाम जुड़ गया है। हैरत की बात ही कि हेमंत भाजपा के नेता नहीं हैं बल्कि अभी दस – पंद्रह दिन पहले तक वे जबरदस्त कांग्रेसी थे। हेमंत हुडा के समर्थक थे, लेकिन न जाने किस वजह से वे मुख्यमंत्री मनोहर लाल व मोदी की जय जयकार करने लगे। हेमंत नेता भले ही न हों लेकिन इंटरनेट मीडिया पर वे एक जानी मानी हस्ती हैं।

जब वे हुड्डा के लिए बैटिंग कर रहे थे तब वे हुड्डा के विरोधियों के निशाने पर थे और अब भाजपा विरोधियों के निशाने पर है। लेकिन हिसार निवासी हेमंत सिंह फोगाट को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता। आखिर हेमंत ने पाला क्यों बदला, उनकी क्या मजबूरियां रही होंगी, इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है।

ओमप्रकाश चौटाला और नीतीश कुमार की मुलाकात बनी चर्चा का विषय, दोनों को ही राजनीति में एक दूसरे से कोई फायदा नहीं

कांग्रेस से भाजपा में आए चौधरी बीरेंद्र सिंह को 7 साल हो चुके हैं। उनके साथ न तो कोई ट्रेजेडी हुई है और न ही कोई कॉमेडी, लेकिन फिर भी आज कल वे चिंतित हैं। बीरेंद्र सिंह के विधानसभा क्षेत्र फल उप मुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह का कब्जा है। यदि गठबंधन रहा तो उनके परिवार के किसी भी सदस्य को टिकट नहीं मिल पाएगी। हिसार लोकसभा से उनके बेटे बृजेंद्र सिंह सांसद हैं जो कि दुष्यंत सिंह को हराकर जीते थे।

यदि गठबंधन होने पर जाजपा को भाजपा को एक भी लोकसभा सीट देनी पड़ी तो वह सीट हिसार ही होगी, दुष्यंत पहले ही वहां से सांसद रह चुके हैं। इस कठिन परिस्थिति में चौधरी बीरेंद्र सिंह कभी ओमप्रकाश चौटाला के साथ चर्चा करते हैं तो कभी तो कभी उनके समर्थक आम आदमी आर्टी के सुशील गुप्ता से वे नजदीकी बना रहे हैं। जब सुशील कांग्रेस में थे तो बीरेंद्र के अति प्रिय थे। चौधरी बीरेंद्र सिंह असमंजस में हैं कि आखिर वे जाएं तो जाएं कहां ?

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