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हरियाणा में एक किसान ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है

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आज कल के समय में जहां चारो ओर केवल भ्रष्टाचार फैला हुआ है, हर कोई जल्द से जल्द पैसे कमाना चाहता है। वहां एक किसान ने अपनी ईमानदारी की मिसाल पेश की है। 5 सालों से यह किसान सरकार के रुपए लौटाने के लिए दर बदर की ठोकरें खा रहा है।

हरियाणा के जींद जिले के जुलाना कस्बे में खरेटी गांव के एक किसान सूरजमल नैन के खाते में सरकार द्वारा गलती से अधिक राशि जमा करा दी गई थी। इस एक्स्ट्रा राशि को सूरजमल नैन सरकार को वापिस लौटना चाहते हैं। इसके लिए उनको बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है।

हरियाणा में एक किसान ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है

बता दें कि साल 2016 में सूरजमल के खाते में तहसीलदार कार्यालय के खाते से 53000 रुपए एक्स्ट्रा जमा हो गए थे। सरकार ने सफेद मक्खी और अन्य कारणों से खराब हुई कपास की फसलों के लिए 2015 में प्रति एकड़ 8 हजार रुपए का मुआवजा वितरित किया गया था। लेकिन किसान सूरजमल और उनके भाई के खाते में 70 हजार के करीब राशि जमा करा दी गई थी।

किसान सूरजमल नैन ने सवा दो एकड़ में कपास की फसल बोई थी और इसलिए उनका मुआवजा 16 हजार के आस पास बनता था।

हरियाणा में एक किसान ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है

किसान को जैसे ही इस बात का पता चला उसने तुरंत ही तहसीलदार कार्यालय में स्पीडपोस्ट के माध्यम से पत्र लिखकर भेजा और रुपए वापिस लेने के लिए आग्रह किया। जब यहां बात नहीं बनी तब उसने डीसी कार्यालय से संपर्क किया। लेकिन वहां भी बात नहीं बनी तो उसने सीएम विंडो के पास रुपए वापिस लेने की अर्जी लगाई।

किसान के इतने प्रयासों के बावजूद सरकार ने रुपए वापिस नहीं लिए। अंत में किसान ने चंडीगढ़ सीएम हाउस में पैसे वापिस लेने के लिए गुहार लगाई। लेकिन वहां भी कोई समाधान नहीं हुआ। करीब 5 सालों से किसान सरकार के पैसे वापिस करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

हरियाणा में एक किसान ने ईमानदारी की मिसाल पेश की है

किसान सूरजमल नैन ने कहा कि अगर किसी का गुम हुआ पैसा या पर्स कोई वापिस करता है तो वापिस करने वाले का स्वागत किया जाता है। उसे इनाम दिया जाता है। लेकिन वह इस बड़ी रकम को लौटाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

किसान सूरजमल ने आगे कहा कि वह सरकार के इस रवैये के बहुत खफा हैं। सरकार के इस रवैये से उनके काम करने का तरीका पता चलता है। इतने सालों से वह इन एक्स्ट्रा रुपयों को वापिस करने के संघर्ष कर रहा है। लेकिन अभी तक किसी ने भी उसकी बात पर गौर नहीं किया।

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