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जिस बहन का नहीं था कभी कोई भाई, इस राखी पर उसे मिली दर्जनों से भी ज्यादा भाईयों की सौगात

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रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार जो ना सिर्फ भाई-बहन के असीम प्यार का प्रतीक होता है, बल्कि उस बंधन से बंधा होता है जिस लम्हें बहन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर जीवन भर उनसे अपनी रक्षा का वचन लेती हैं। इसी रक्षाबंधन के चलते दुनिया का हर भाई अपनी बहन के लिए समाज से लड़ने और उसे समाज की बुरी नजरों से बचाने के लिए वचनबद्ध हो जाता है।

रक्षाबंधन पर सभी बहनें अपने भाइयों की सुनी कलाइयों पर राखी बांध कर उनका मुंह मीठा करवाती है। मगर जिनका कोई भाई नहीं होता उनके चेहरे पर मायूसी के बादल हमेशा ही देखने को मिलते हैं। ऐसा ही एक काशीपुर में रहने वाली बहन के साथ था, जिसका कोई भाई नहीं था। मगर अचानक इस रक्षाबंधन पर उसके दर्जनों भाई आए तो उसकी खुशियों का ठिकाना नहीं रहा हर कोई उसकी दास्तान दंग ही रह गया।

जिस बहन का नहीं था कभी कोई भाई, इस राखी पर उसे मिली दर्जनों से भी ज्यादा भाईयों की सौगात

दरअसल, इनका जिंदगी का अधिकांश पल अत्याधुनिक बम बारूदओं के साथ गुजरी है। जिन हाथों में अत्याधुनिक हथियार बम बारूद हो ऐसा हाथों में राखी बांधकर बहन ने उनकी दीर्घायु की कामना की और अपनी हिफाजत का वचन लिया है।


वैसे, तो भारत देश में ऐसे भी बहने हैं, जिनका कोई भाई नहीं और ऐसे भी भाई हैं। जिनकी कोई बहन नहीं, ऐसी किस्मत लेकर पैदा हुई कांग्रेस नेत्री मुक्ता सिंह जिनका कोई भाई नहीं लेकिन कांग्रेस नेत्री मुक्ता सिंह अचानक 50 से अधिक भाई मिल गए.जो पूर्व रिटायर फौजी है।

जिस बहन का नहीं था कभी कोई भाई, इस राखी पर उसे मिली दर्जनों से भी ज्यादा भाईयों की सौगात

इस अवसर पर कांग्रेस मुक्ता सिंह ने सैनिकों को राखी बनते बनते भावुक हो उठी थी। दरअसल, कांग्रेस नेता मुक्ता सिंह ने अपने 50 से अधिक रिटायर फौजियों के टीका लगाकर आरती उतारी और कलाइयों पर राखी बांधकर उनकी दीर्घायु की भगवान से कामना की साथी उनसे वचन लिया हैं। जैसे दिल जान से सरहदों पर देश की रक्षा करते थे वैसे ही अब वह अपनी बहन की रक्षा करेंगे।

जिस बहन का नहीं था कभी कोई भाई, इस राखी पर उसे मिली दर्जनों से भी ज्यादा भाईयों की सौगात

इसके साथ ही रक्षाबंधन के त्यौहार पर कांग्रेस नेत्री मुक्ता सिंह ने लोगों से अपील की है, कि जैसे सम्मान हम फौजी को ड्यूटी के टाइम देते हैं वैसे ही सम्मान उन्हें रिटायरमेंट के बाद भी देना चाहिए, क्योंकि समाज में लोग फौजी को सम्मान जब तक करते हैं। जब तक वह सीना ताने हमारी सुरक्षा में बॉर्डर पर खड़े रहते हैं और रिटायरमेंट के बाद उनको सम्मान नहीं मिलता है। मगर हमारा कर्तव्य बनता है रक्षा बंधन पर न सिर्फ अपने भाइयों बल्कि उन भाईयों की सुनी कलाइयों को भी अपनी रंग बिरंगी राखियों से भरे जो देश के प्रति जागरूकता पैदा करने में अपनी अहम भूमिका अदा करने में कभी कोई कोर कसर नहीं छोड़ता।

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