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किसान आंदोलन : हरियाणा में किसानों नेताओं की नजरों में खटक रहे हैं राकेश टिकैत, जानिए क्या है वजह

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फरीदाबाद : तीन कृषि कानून के विरोध में दिल्ली की सीमाओ चल रहे किसान आंदोलन का बड़ा चेहरा राकेश टिकैत को माना गया है और वही इस आंदोलन को पुनर्जीवित करने की वजह भी राकेश टिकैत के आंसुओं को बताया जा रहा है लेकिन जिसको जितनी प्रसिद्धि मिलती है उसके दुश्मन भी उतने हो जाते हैं उतने ही लोगों की नजर में आना शुरू हो जाता हैं इसी में राकेश टिकैत भी बहुत सारे किसान नेताओं की नजरों में खटक रहे हैं।

कुछ किसान नेता तो सीधे राकेश टिकैत का नाम लेते हैं और कुछ बिना नाम लिए ही आरोप लगाते हैं कि टिकैत किसान आंदोलन को सही ढंग से नहीं चलने दे रहे हैं इतिहास के पन्नों को यदि उठाकर देखा जाए तो किसी भी आंदोलन का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है

किसान आंदोलन : हरियाणा में किसानों नेताओं की नजरों में खटक रहे हैं राकेश टिकैत, जानिए क्या है वजह

किसान नेता यह तर्क देते हैं की आम जनता को खून इतना सस्ता और मीठा हो गया है कोई बाहरी आदमी इसे पीने की कोशिश करता है और इसी खून से होली खेली जाती है

यहां पर बाहरी व्यक्ति का मतलब सीधे किसान नेता राकेश टिकैत पर इशारा करते है हरियाणा के किसानों का कहना है कि 9 महीने से पूरे आंदोलन में उत्तर प्रदेश के अंदर प्रशासन और किसानों के बीच कोई भी टकराव नहीं हुआ जबकि वहां पर भी भाजपा की ही सरकार है और हरियाणा में भी भाजपा की सरकार है

किसान आंदोलन : हरियाणा में किसानों नेताओं की नजरों में खटक रहे हैं राकेश टिकैत, जानिए क्या है वजह

लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सिर्फ हरियाणा में ही आंदोलन के समय में प्रशासन और किसानों के बीच में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है और यह टकराव बढ़ता ही जा रहा है वही किसान नेताओं द्वारा भड़काऊ की स्थिति पैदा की जाती है बता दें

किसान आंदोलन : हरियाणा में किसानों नेताओं की नजरों में खटक रहे हैं राकेश टिकैत, जानिए क्या है वजह

बता दे अपने हक हुकुम की लड़ाई के लिए किसान 26 नवंबर से दिल्ली की सरहदों पर हरियाणा की सीमाओं पर बैठे इस आंदोलन को चला रहे हैं लेकिन यदि बात की जाए टकराती तो हरियाणा ही एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें प्रशासन और किसानों का यह रण क्षेत्र बन गया है दोनों पक्षों को रखा जाए तो ना किसान अपनी बात से पीछे हट रहे हैं और ना ही प्रशासन किसी सलाह के मूड में नजर आ रहा है

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