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UN सुरक्षा परिषद के चुनाव में भारत की विजय, इन देशों को छोड़ा पीछे

भारत एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का अस्थाई सदस्य बन गया है। भारतीय समायनुसार बीती रात हुए वोटिंग में भारत में 192 में से 184 वोट मिलेगे। 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 75वें सत्र के लिए अध्यक्ष, सुरक्षा परिषद के अस्थाई सदस्यों और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद के सदस्यों के लिए चुनाव कराया था। भारत पहली बार 1950 में अस्थायी सदस्य के रूप में चुना गया था। बता दें, UNSC में कुल 15 देश हैं। इनमें से 5 यानी अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन स्थायी सदस्य हैं। वहीं, हर साल UNSC 2 साल के कार्यकाल के लिए 5 अस्थायी सदस्यों कुल 10 में से का चुनाव करती है।

भारत आठवीं बार सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य चुना गया है । इसके पहले 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92 और 2011-12 में भारत यह जिम्मेदारी निभा चुका है। अमेरिका ने भारत के अस्थायी सदस्य चुने जाने पर खुशी जाहिर की है और उम्मीद जताई है कि दोनों देश मिलकर काम करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने प्रसन्नता जताते हुए बताया कि सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के लिए हुए चुनाव में भारत को भारी समर्थन मिला है। आठवीं बार भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य बन गया। बुधवार को हुए चुनाव में दो साल के लिए चयनित अस्थायी सदस्य भारत ने 193 सदस्यों वाले आम सभा में 184 वोटों की जीत हासिल की | भारत के साथ आयरलैंड मेक्सिको और नार्वे को भी यह सदस्यता हासिल हुई है। वोटिंग के लिए 192 सदस्य देश मौजूद थे और दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। भारत को 184 वोट मिले। कनाडा यह चुनाव हार गया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी दूतावास ने ट्वीट में बताया, ‘सुरक्षा परिषद में 2021-22 टर्म के लिए सदस्य देशों ने भारत का चुनाव कर लिया। भारत को 192 में से 184 वोट हासिल हुए।’ वर्ष 2021 के 1 जनवरी से भारत संयुक्त राष्ट्र के अस्थायी सदस्य के तौर पर उसके पांच स्थायी सदस्यों चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका व अस्थायी सदस्य एस्टोनिया, नाइजर, संत विंसेंट और ग्रेनाडाइन्स, ट्यूनिशिया और वियतनाम के साथ बैठेगा। बेल्जियम, डॉमिनिकन रिपब्लिक, जर्मनी, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका का दो साल का कार्यकाल इस साल खत्म हो रहा है। परिषद का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार देशों को दो तिहाई मतों की जरूरत होती है जो असेंबली में मौजूद सदस्य देशों का होता है।

भारत 2021-22 कार्यकाल के लिए एशिया-प्रशांत श्रेणी से अस्थायी सीट के लिए उम्मीदवार है। भारत की जीत इसलिए तय मानी जाती रही है, क्योंकि वह समूह की इस इकलौती सीट के लिए एकमात्र उम्मीदवार है। चीन और पाकिस्तान समेत 55 सदस्यीय एशिया-प्रशांत समूह ने पिछले साल जून में सर्वसम्मति से भारत की उम्मीदवारी का समर्थन किया था।महासभा हर साल दो वर्ष के कार्यकाल के लिए कुल 10 में से पांच अस्थायी सदस्यों का चुनाव करती है। ये 10 अस्थायी सीटें क्षेत्रीय आधार पर वितरित की जाती हैं। पांच सीटें अफ्रीका और एशियाई देशों के लिए, एक पूर्वी यूरोपीय देशों, दो लातिन अमेरिका और कैरिबियाई देशों तथा दो पश्चिमी यूरोपीय तथा अन्य राज्यों के लिए वितरित की जाती हैं।

परिषद में चुने जाने के लिए उम्मीदवार देशों को सदस्य देशों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने कहा कि इस परिषद में भारत की मौजूदगी से ‘वसुदैव कुटुम्बकम्’ के उसके लोकाचार को दुनिया तक लाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबिंत करने और विश्वसनीय बने रहने के लिए बदलने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र इस साल अपनी 75वीं वर्षगांठ मना रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के अस्थायी सदस्य चुने जाने के लिए 128 वोटो की जरूरत थी। लेकिन भारत को भारी समर्थन मिला। बताया जा रहा है कि भारत को उम्मीद थी कि उसे 2021-22 के कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र उच्च-तालिका में लाएगा।

Written by- Prashant K Sonni

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