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सरकार से सुप्रीम कोर्ट को मिले असंतुष्ट जवाब को अस्वीकार कर मांगा तोड़फोड़ का असल हिसाब

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अवैध कब्जे के नाम पर अरावली वन क्षेत्र में तेजी से निगम अधिकारियों द्वारा पीला पंजा चलाते हुए सैकड़ों की जमीन पर बने मकानों को ध्वस्त कर दिया। मगर जब सोमवार को सुनवाई हुई और ऐसे में हरियाणा सरकार द्वारा जो भी जवाब सुप्रीम कोर्ट को पेश किए गए उसे सपनों को साकार करते हुए भेजे अभी तक किए गए तोड़फोड़ का हिसाब मांगा।

इसके अलावा भी सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से अरावली में सभी तरह के अवैध निर्माणों को पूरी सूची की मांग करी है, और कहा है कि 23 जुलाई से लेकर अब तक कितने अवैध निर्माण हटाए उनकी पूरी लिस्ट अगले सोमवार को दी जाए। यानी की अब अगली सुनवाई 27 सितंबर को होगी।

सरकार से सुप्रीम कोर्ट को मिले असंतुष्ट जवाब को अस्वीकार कर मांगा तोड़फोड़ का असल हिसाब

फरीदाबाद में अरावली फॉरेस्ट का एरिया 5 हजार हेक्टेयर के करीब है। जिसमें से 500 हेक्टेयर जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। इन कब्जों में अवैध फार्महाउस, बैंक्वेट हॉल, गौशाला, आश्रम, शैक्षणिक संस्थान बनाए गए हैं। अरावली में पंजाब भू संरक्षण अधिनियम 1900 की धारा 4 और 5 के अंतर्गत हुए इन सभी निर्माणों को तोड़ने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिये थे। 23 जुलाई के आदेश के बाद वन विभाग व जिला प्रशासन ने तोड़फोड़ की कार्रवाई से पहले नोटिस देने का काम भी शुरू कर दिया था लेकिन ये काम धीमा पड़ गया।

सरकार से सुप्रीम कोर्ट को मिले असंतुष्ट जवाब को अस्वीकार कर मांगा तोड़फोड़ का असल हिसाब

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा सरकार ने सोमवार को 13 पेज का जो जवाब दिया था उसमें स्टेट लेवल कमेटी की मीटिंग का हवाला दिया हुआ है। जिसमें सभी जिलों के अधिकारी मौजूद थे। सीनियर आईएएस एके सिंह की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में कुछ निर्णय लिये जिसमें फरीदाबाद में अरावली का इलाका गैर मुमकिन पहाड़ माना है यानी कि यहां पर कई शैक्षणिक संस्थान के अलावा कुछ कमर्शल गतिविधियां भी हैं। गैर मुमकिन पहाड़ फॉरेस्ट की श्रेणी में नहीं आता है। कुल मिला कर सरकार इन अवैध निर्माणों को बचाने की तैयारी कर चुकी थी।

सरकार से सुप्रीम कोर्ट को मिले असंतुष्ट जवाब को अस्वीकार कर मांगा तोड़फोड़ का असल हिसाब

सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को आदेश जारी किये थे कि अरावली वन क्षेत्र से अवैध निर्माण को हटाया जाए लेकिन वन विभाग के सुस्त रवैये के कारण एक महीना बीत जाने के बाद भी अभी तक केवल 9 फार्म हाउसों को ही तोड़ा गया। इसके अलावा जमाई कॉलोनी में बसे 300 घर, महालक्ष्मी डेरी में बसे 100 के करीब झुग्गियों को तोड़ा है। वन विभाग के अनुसार कुल 130 फार्म हाउस अरावली में है जिनमें से 9 तोड़ दिये आज भी 121 फार्म हाउस मौजूद है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद शायद अब वन विभाग फिर से तोड़ने की कार्रवाई शुरू करे।

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