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जानिए क्यों खास है ‘बिहार रेजिमेंट’ चीन से लोहा लेने वाली, बहादुरी के और भी कई क़िस्से हैं

कहावत है, जब बात देश पर आती है तो छोटा बच्चा भी किसी योद्धा से कम नहीं होता | भारतीय सैना विश्वभर में अपने पराक्रम और शौर्य के लिए जानी जाती है | हर एक रेजिमेंट से देश के दुशमन थर-थर कांपते हैं, बात करते हैं बिहार रेजिमेंट जिसके जवानों ने गत दिनों चीन से लड़ देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए | बिहार रेजिमेंट शुरू से ही भारत के तमाम महत्वपूर्ण सैन्य संघर्षों का हिस्सा रही है | चीन के साथ बिहार रेजिमेंट का खूनी संघर्ष गत सोमवार को हुआ था | लद्दाख में इंडिया -चीन बॉर्डर पर धोखे से हुए चीनी हमले में बिहार रेजिमेंट के अधिकारी समेत जवान शहीद हुए हैं | देश के लिए अपनी जान देना बिहार रेजिमेंट की परंपरा रही है | बिहार रेजिमेंट की अनेक शौर्य गाथाएं इतिहास में दर्ज हैं |

फौज में यूँ तो हर रेजिमेंट महान है अपनी काबलियत के लिए विश्वभर में नाम है | लेकिन बिहार रेजिमेंट की अलग ही बात है। चाहे हम सर्जिकल स्ट्राइक की बात करें या कारगिल युद्ध की, बिहार रेजिमेंट ने हर तरफ अपने साहस का परिचय दिया है और प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की है। बिहार रेजिमेंट को भारतीय सेना का एक मजबूत अंग माना जाता है।

जबसे भारत आज़ाद हुआ है तभी से भारत में जितने युद्ध हुए उनमें लगभग सभी युद्धों में बिहार रेजिमेंट की टुकड़ियों ने हिस्सा लिया, अपने साहस और पराक्रम के लिए बहुत से अवॉर्ड्स जीते | ‘वीर बिहारी’ के नाम से भी पुकारी जाने वाली इस रेजिमेंट ने संयुक्त राष्ट्र के शांति ऑपरेशनों जैसे पीसकीपिंग ऑपरेशन्स के तहत सोमालिया और कोंगो में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है | बिहार रेजिमेंट की स्थापना वर्ष 1941 में हुई थी |

बिहार रेजिमेंट के बारे में और अच्छे से जानिए –

  1. उरी सर्जिकल स्ट्राइक – कोई देशभक्त 18 सितंबर 2016 को नहीं भूल सकता जब नापाक पाकिस्तान के आंतकवादिओं ने उरी में हमला किया था | उरी हमला बिहार रेजिमेंट के लिए हम ऐतिहासिक कह सकते हैं क्योंकि जम्‍मू कश्‍मीर के उरी सेक्‍टर में पाकिस्‍तानी सीमा से आए घुसपैठियों से मुकाबले में बिहार रेजीमेंट के 15 शूरवीरों ने देश के लिए जान न्यौछावर कर दी थी | उरी सेक्टर स्थित भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले में कुल 17 जवान शहीद हुए थे, जिनमें सबसे ज़्यादा 15 जवान बिहार रेजिमेंट के थे | इनमें से 6 बिहार मूल के थे |
  2. मुंबई हमला 26/11 – वो दौर कुछ अलग ही था हर दिन टीवी पर आतंकी हमलों की ख़बरें आती रहती थीं | साल 2008 में जब मुंबई में आतंकी हमला हुआ, तब एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ऑपरेशन ब्लैक टॉरनैडो में शहीद हुए थे | दरसअल, मेजर उन्नीकृष्णन बिहार रेजीमेंट के थे | जिन्हें प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में भेजा गया था |
  3. कारगिल युद्ध – कारगिल युद्ध को आखिर कौन भूल सकता है ? भारतीय सैना ने पाकिस्तान को उसकी असली औकात दिखा दी थी | जुलाई 1999 में बटालिक सेक्टर के पॉइंट 4268 और जुबर रिज पर पाकिस्‍तानी घुसपैठियों के कब्जे की कोशिश को बिहार रेजिमेंट के जवानों ने ही नाकाम किया था | कारगिल युद्ध में बिहार रेजिमेंट के तक़रीबन 10 हजार जवान शामिल हुए थे।
  4. 1971 दुनिया का सबसे बड़ा सरेंडर – 1971 के युद्ध ने बहुत सी चीज़े बदल कर रख दी थी | वर्ष 1971 के बांग्लादेश युद्ध के वक़्त नापाक पाकिस्तानी सेना से संघर्ष के दौरान बिहार रेजिमेंट के किस्से दुनियाभर में विख्यात हैं | ऐसा कहा जाता है कि गोलियां कम पड़ने पर बिहार रेजिमेंट के जवानों ने दुश्मन को संगीनों से ही मार दिया था | उस युद्ध में पाकिस्तान के 96 हजार सैनिकों ने बिहार रेजिमेंट के शूरवीरों के आगे ही घुटने टेके थे | इस आत्‍मसमर्पण को दुनिया में लड़े गए अब तक के सभी युद्धों में रिकॉर्ड माना जाता है |

बिहार रेजिमेंट से जुडी कुछ और रोचक जानकरि –
बिहार रेजिमेंट का स्लोगन क्या है – बिहार रेजिमेंट का स्लोगन कर्म ही धर्म है |
बिहार रेजिमेंट का वाक्य क्या है – बिहार रेजिमेंट का वाक्य जय बजरंगबली व बिरसा मुंडा की जय की हुंकार इस रेजीमेंट का वाक्य है। इस वाक्य को कहते हुए रेजिमेंट के जवान अपने में जोश भरते हैं और दुश्मन के को धूल चटा देते हैं।

जब देश में थी दीवाली, वो झेल रहे खेल रहे थे होली | जब हम बैठे थे घरों में, वो झेल रहे थे गोली | जवानों के लिए एकदम सही कहावत है ये | लेकिन कुछ लोग सैना की बहादुरी पर सवाल उठाते हैं यह चीज़ हमें नहीं करनी चाहिए देश और देश के जवानों के साथ हमें हर वक़्त खड़े रहना चाहिए |

  • Written By Om Sethi

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