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कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है स्वाति, फर्राटेदार अंग्रेजी, बावजूद इसके भीख मांगने को है मजबूर

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अच्छी शिक्षा ग्रहण करना आज के इस आधुनिक युग में बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि अच्छी तकनीक सीखना और कंप्यूटर ऑपरेट करना जानते हैं तो इन सब के माध्यम से आप एक अच्छी नौकरी पा सकते हैं लेकिन तमाम तकनीकी शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी अगर आपको जॉब नहीं मिलती और जीवनयापन के लिए आपको मजबूरन भीख मांगनी पड़ती है।

इस स्थिति की कल्पना मात्र से ही रूह कांप जाती है। लेकिन यह मामला पूर्णतः सच है। दरअसल उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट महिला अस्सी घाट पर भीख मांगने को मजबूर है।

कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है स्वाति, फर्राटेदार अंग्रेजी, बावजूद इसके भीख मांगने को है मजबूर

आज हम आपको एक लाचार महिला की कहानी बताने जा रहे हैं जो शायद इस सिस्टम पर सवाल भी खड़ा कर रहे हैं। इस महिला का नाम स्वाति हैं, वह बनारस के अस्सी घाट पर भीख मांगने का कार्य करती है लेकिन यह काम भी वह प्रतिदिन पूरी निष्ठा के साथ करती है यानी कि प्रतिदिन अपने समय से स्थान पर बैठ जाती हैं और दैनिक तरीके से भीख मांगने का कार्य करती है।

कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है स्वाति, फर्राटेदार अंग्रेजी, बावजूद इसके भीख मांगने को है मजबूर

यूपी के वाराणसी में पिछले 3 सालों से सड़कों पर भीख मांग कर अपना पेट भरने वाली स्वाति पिछले दिन की तरह ही भीख मांग रही थी, उसी समय BHU में पढ़ने वाले छात्र अवनीश वहां पहुंचे तो उन्होंने भी स्वाति को भीख के रूप में कुछ पैसे देना चाहा लेकिन स्वाति ने उसको स्वीकार नहीं किया और बोली हमें भीख में पैसे नहीं नौकरी चाहिए। उसके बाद अवनीश ने स्वाति का वीडियो रिकॉर्ड किया और उसकी समस्या को फेसबुक पर लिख कर डाल दिया।

कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है स्वाति, फर्राटेदार अंग्रेजी, बावजूद इसके भीख मांगने को है मजबूर

महिला ने बताया कि वह कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट है। अपनी स्थिति के बारे में वह कहती है कि बच्चा होने के बाद वह दाईं तरफ से पैरालाइज्ड हो गई इसके बाद से उसके शरीर के एक हिस्से ने काम करना बंद कर दिया और वह घर छोड़कर चली आई। वह पिछले तीन साल से घाटों पर ही रह रही है। वहां जो भी मिलता है वह खा लेती है और घाट पर ही सोती है।

कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट है स्वाति, फर्राटेदार अंग्रेजी, बावजूद इसके भीख मांगने को है मजबूर

महिला कहती है कि कुछ लोग सोचते हैं कि वह मानसिक रूप से बीमार है। जबकि वह पूरी तरह से स्वस्थ है। वह फर्राटेदार इंग्लिश में भी बात कर रही है। मदद के नाम पर उसने कहा कि उसे भीख नहीं चाहिए। वह कंप्यूटर चलाना जानती है और टाइपिंग से लेकर दूसरे सॉफ्टवेयर भी यूज करना जानती है।

उसने कहा कि उसे भीख नहीं जॉब चाहिए। एक अच्छी जॉब उसे जिंदगी की नई राह दिखा सकती है।

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