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भैंस से था परिवार के सदस्य की तरह प्रेम, निधन के बाद कि सत्रहवी, 8 गांव का कराया भंडारा

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आपको पता ही है कि जब कोई व्यक्ति शरीर छोड़ देता है तो उसके बाद उसकी टेरवी करते है, जिससे कि उसकी आत्मा को शांति मिले। अब मनुष्यों की 13 वी तो सभी करते है, मगर आज हमारे सामने एक मामला आया है जिसमें एक व्यक्ति ने अपनी भैस की सत्रहवी मनाई है।

मिली जानकारी के अनुसार दिल्ली की सीमा से सटे सोहटी गांव निवासी जयभगवान उर्फ़ लीलू एक किसान और पशुपालक है। वह काफी समय से एक भिंडी भैस को पाल रहे थे।

भैंस से था परिवार के सदस्य की तरह प्रेम, निधन के बाद कि सत्रहवी, 8 गांव का कराया भंडारा

पशुपालक ने बताया कि वह  वर्ष 1999 में उसके भाई की ससुराल से वह करीब 3 साल की कटिया लेकर आया था। कटिया का पालन पोषण उसने बड़े ही लाड़ प्यार से किया था। उसके बाद से अब तक उसने 21 कटिया व 1 कटड़े को जन्म दिया था।

यह भैस उनके परिवार के सदस्य के भांति थी। उस भैस की अब मृत्यु हो गई। उसने भैस को ना केवल अपने प्लाट में दफनाया, बल्कि उसकी सत्रहवी कर नाते – रिश्तेदार व आसपास के आठ गावों के लोगो को प्रतिभोज कराया।

भैंस से था परिवार के सदस्य की तरह प्रेम, निधन के बाद कि सत्रहवी, 8 गांव का कराया भंडारा

इससे पता चलता है कि लोग अभी भी पशुओं से बहुत प्रेम करते हैं। उनको अपने समान मानते हैं। परिवार का एक हिस्सा मानते हैं। उन्हें भी उसी समान प्यार देते हैं। तो इससे हम देख सकते हैं कि जय भगवान ने भी वही किया कि अपनी भैंस के निधन के बाद उसने भी विधिवत उसका अंतिम संस्कार किया और फिर सत्रहवी में भी मनाई।

इसके अलावा उसने एक गार्डेन भी बुक कराया, जहां प्रतीभोज करने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे। किसान जयभगवान का यह काम क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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