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एक अस्पताल की रिपोर्ट पॉजिटिव दूसरे की नेगेटिव, दुविधा में फसा संक्रमित

फरीदाबाद में कोरोना की स्थिति चरम पर है 22 जून को फरीदाबाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार अबतक जिले में 2400 से अधिक पॉजिटिव मामले सामने आ चुके है। लेकिन अभी तक भी स्वास्थ्य विभाग की कोरोना जांच की रिपोर्ट की विश्वशनीयता को लेकर सवाल खड़े हो रहे है।

इसी से जुड़ा एक मामला सामने आया जब फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल की लैब द्वारा एक व्यक्ति की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव बताई गई लेकिन बाद में जब उसने गुरुग्राम की एक अन्य लैब में जांच कराई तो उसी व्यक्ति की रिपोर्ट नेगेटिव पाई गई।

मामले की जानकारी देते हुए फरीदाबाद के सेक्टर 55 निवासी गुलशन ने बताया कि उसने 28 मई को अपने भाई की नीलम चौक के नजदीक एक निजी लैब में कोरोना जांच कराई थी और रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया था।

इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के आदेशानुसार सावधानी बरतते हुए उन्होंने अपने माता पिता एवं परिवार के अन्य सदस्यों की भी फरीदाबाद के सेक्टर 16 स्थिति एक निजी अस्पताल में कोरोना जांच कराई थी जिसमे केवल उनके पिता की रिपोर्ट पॉजिटिव बताई गई।

पिता की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा उनके पिता को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज ओर अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया था। लेकिन बाद में जब उन्होंने गुरुग्राम के एक लैब में अपने पिता कि जांच कराई तो 17 जून को उनके पिता की रियोर्ट नेगेटिव बताई गई।

इस रिपोर्ट के आधार पर जब गुलशन एवं उनके परिवारजनों ने ईएसआईसी अस्पताल प्रबंधन पर उनके पिता को छुट्टी देनें की मांग की तो अस्पताल प्रबंधन द्वारा मना कर दिया गया। लेकिन जब मामला मीडिया एवं अस्पताल के आला अधिकारियों के संज्ञान में आया तो गुलशन के पिता को छुट्टी दे दी गई लेकिन होने होम क्वॉरेंटाइन पर रहने को कहा गया है।

इस पूरे मामले पर फरीदाबाद के उप सिविल सर्जन डॉ राम भगत का कहना है कि उनके संज्ञान में इस प्रकार का कोई भी मामला नहीं आया है। यदि उन्हें कोई शिकायत प्राप्त होती है तो मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर अस्पताल के खिलाफ कार्यवाही भी की जाएगी।

इस पूरे मामले पर सवाल यह उठता है कि इस महामारी से लड़ते हुए करीब 3 माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस प्रकार की लापरवाही किस हद तक सही है। फरीदाबाद में एक बार पहले भी एक निजी लैब द्वारा एक पूरे परिवार की रिपोर्ट गलत दे दी गई थी जिस पर कार्यवाही करते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लैब को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था।

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