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फाइनल वर्ष के छात्रों कि परीक्षा भी हुई रद्द, बिना परीक्षा दिए छात्रों को इस आधार पर किया जाएगा पास

बीते कई दिनों से एक मुद्दा काफी चर्चा का विषय बना हुआ था की हरियाणा में कई सरकारी यूनिवर्सिटी द्वारा अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं अनिवार्य की गई थी जिसको लेकर छात्रों में सरकार और शिक्षण संस्थानों पर भेदभाव करने का आरोप लगाया जा रहा था।

क्योंकि शिक्षण संस्थानों द्वारा प्रथम एवं द्वितीय वर्षों के छात्रों को बिना परीक्षाएं लिए अगली कक्षाओं में प्रमोट करने के निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए थे। वही बारहवीं कक्षा के छात्रों की बची हुई परीक्षा लिए बिना ही उन्हें भी अगली कक्षा में प्रमोट करने के आदेश जारी किए गए थे।

लेकिन अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए यह निर्देश दिए गए थे कि 1 जुलाई से 30 जुलाई के बीच अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं ली जाएगी और 7 अगस्त को उनका परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। जिसके लिए एमडीयू एवं कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों की डेटशीट भी जारी कर दी गई थी।

जिनके तहत बीए, बीकॉम एवं अन्य कक्षाओं के अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षाएं 10 जुलाई से शुरू की जानी थी लेकिन हरियाणा सरकार द्वारा छात्रों के साथ किए जा रहे इस भेदभाव को लेकर छात्रों द्वारा सरकार पर आरोप लगाया जा रहा था कि जिस प्रकार प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को कोरोना से खतरा है उसी प्रकार अंतिम वर्ष के छात्र भी इस वायरस से उसी प्रकार प्रभावित हो सकते है।

इसी मामले को लेकर छात्रों द्वारा पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में यचिका भी दायर की गई जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस भी जारी किया गया था। अब सरकार की तरफ से यह फैसला लिया गया है कि जिस प्रकार प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के छात्रों को बिना परीक्षाओं के इंटरनल मार्क्स के आधार पर अगली कक्षाओं में प्रमोट किया गया है।

उसी प्रकार अंतिम वर्ष के छात्रों को भी अगली कक्षाओं में प्रमोट किया जा रहा है। सरकार के इस फैसले के बाद छात्रों में खुशी की लहर देखने को मिल रही है क्योंकि छात्रों का कहना है कि कोई भी परीक्षा छात्रों की जान से अधिक महत्वपूर्ण नहीं हो सकती है।

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