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खून साफ करने में सहायक हैं पश्चिमोत्तानासन ,जाने विधि और फायदे

योग तन ओर मन को दोनों को स्वास्थ्य रखता हैं यह कहना ओ३म योग संस्थान ट्रस्ट पाली, फरीदाबाद, हरियाणा के संस्थापक ओमप्रकाश महाराज का ,,योग के लिये लोगों को प्ररित करते हुए उन्होंने आज पश्चिमोत्तानासन के लाभ बताए ।


पश्चिमोत्तानासन का नाम दो शब्दों के मेल से बना है : पश्चिम और उत्तान। पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ। रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करने का तरीका (How To Do Paschimottanasana), फायदे (Benefits), सावधानियों के बारे में जानना चाहिए।

इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी (Spine) में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है। यहां पश्चिम का अर्थ पश्चिम दिशा से नहीं बल्कि पीछे के भाग से है। पश्चिमोत्तानासन देखने में बहुत आसान लगता है, लेकिन वास्तव में इस आसन का अभ्यास करना काफी कठिन है।

इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच (Stretch) जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है। जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है।

पश्चिमोत्तानासन करने के फायदे – अन्य योगासन की तरह पश्चिमोत्तानासन करने से शरीर के विभिन्न विकार दूर हो जाते हैं और व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर हो जाता है। यह एक ऐसा आसन है जिसका अभ्यास करने से पूरे शरीर की मांसपेशियों (Muscle) में खिंचाव होता है जिसके कारण यह कई बीमारियों के लक्षणों को दूर करने में फायदेमंद होता है। आइये जानते हैं पश्चिमोत्तानासन के फायदों के बारे में।

तनाव दूर करने में फायदेमंद – पश्चिमोत्तानासन करने से पूरे शरीर के साथ सिर और गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न होता है, जिसके कारण यह आसन तनाव, चिंता, और मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में बहुत सहायक होता है। इसके अलावा यह क्रोध और चिड़चिड़ापन (Irritability) को भी दूर करता है और दिमाग को शांत रखता है।

पेट की चर्बी दूर करने में मददगार – सही तरीके से पश्चिमोत्तानासन का अभ्यास करते समय पेट (Abdomen) की मांसपेशियां खिंचती हैं, जिसके कारण पेट और उसके आसपास की जगहों पर जमी चर्बी दूर हो जाती है।

हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर – पश्चिमोत्तानासन रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न करता है और उन्हें लचीला बनाने का काम करता है। इसके अलावा इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति की लंबाई भी बहुत आसानी से बढ़ने लगती है।

बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद है पश्चिमोत्तानासन – पश्चिमोत्तानासन करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है और खाना न पचने के कारण अक्सर कब्ज एवं खट्टी डकार आने की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा प्रतिदिन इस आसन का अभ्यास करने से किडनी, लिवर, महिलाओं का गर्भाशय एवं अंडाशय अधिक सक्रिय (Activated) होता है।

पश्चिमोत्तानासन करने में क्या सावधानी बरती जाए

  • अगर आपके कन्धो या गर्दन में जकड़न या चोट हो तो पश्चिमोत्तानासन बहुत सावधानी से करें।
  • अगर आपकी पीठ के निचले हिस्से में दर्द या चोट हो, तो पश्चिमोत्तानासन ना करें।
  • अगर आपको दमा या दस्त की शिकायत हो, तो पश्चिमोत्तानासन ना करें।
  • अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक जोर न लगायें।

अनिद्रा की समस्या दूर करता है – इस आसन का अभ्यास करने से व्यक्ति को सही तरीके से नींद आती है और अनिद्रा (insomnia) की समस्या दूर हो जाती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप और डायबिटीज की समस्या को दूर करने में भी यह आसन फायदेमंद होता है।

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