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वाईएमसीए के हॉस्टल परिसर में विद्यार्थियों का समान चोरी, प्रबंधन चुप्पी साधे हुए

कोरोना वायरस महामारी की मार सभी लोग झेल रहे हैं | लेकिन विद्यार्थियों को कोरोना सबसे अधिक परेशान कर रहा है | हरियाणा का सुप्रसिद्ध, जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए अपने छात्रों के उपर केहर ढा रहा है | दरसअल विश्वविद्यालय का बॉयज हॉस्टल परिसर 3 पार्टों में बटा हुआ है, टैगोर हॉल, ज़ाकिर हुसैन हॉल, अन्य | लॉकडाउन के समय बॉयज हॉस्टल की एक विंग क्वारंटीन सेंटर के लिए विश्वविद्यालय ने दी थी | लॉकडाउन पड़ते ही सभी विद्यार्थी अपना छोटे से लेकर कीमती समान हॉस्टल में छोड़ आए थे |

23 जून को विश्वविद्यालय की तरफ से विद्यार्थियों ले नोटिस आया कि वह हॉस्टल से अपना समान ले जाएँ | नोटिस में लिखा गया कि 26 जून तक विद्यार्थी अपना हॉस्टल का कमरा खाली करदें | लेकिन विद्यार्थीं जब वहां पहुंचे तो देख कर उनके मुँह से बस यही निकला “कचरा उठाने के लिए बुलाया है क्या?” क्योंकि उनका समान इस कदर विश्वविद्यालय के प्रबंधन ने फेंका हुआ है कि किताबें कम और कूड़ा ज़्यादा लगे |

विश्वविद्यालय का प्रबंधन हमेशा से ही अपने बुरे वयवहार के लिए चर्चाओं में रहा है | कुछ समय पहले पानी के विवाद को लेकर एक अधिकारी ने छात्र को थप्पड़ मार दिया था | समान लेने गए छात्र जब वहां पहुंचे तो उनकी सुन ने वाला कोई नहीं था | छात्रों के लैपटॉप, जूते, कीमती किताबें, नॉट्स, स्पीकर आदि सभी चीज़े गायब हैं | छात्रों को अगर मिल रहा है वहां जा कर तो बस रद्दी |

हॉस्टल वार्डन का कर्तव्य होता है कि वह छात्रों की बात सुने उनकी हॉस्टल संबंधित समस्याओं को दूर करे | लेकिन वाईएमसीए के हॉस्टल वार्डन का कर्तव्य इस समय मात्र व्हाट्सप्प ग्रुप को लीव कर देना है | कुछ छात्रों ने अपनी समस्यांए वार्डन को बताईं तो उन्होंने व्हाट्सप्प ग्रुप को ही छोड़ दिया और अपना फोन बंद कर लिया |

हॉस्टल प्रबंधन ने तो छात्रों के ऊपर ही आरोप लगाते हुए कहा है कि हॉस्टल के कमरें छात्रों को आवंटित नहीं थे, प्रबंधन अपनी लापरवाही छुपाने के लिए विद्यार्थियों पर आरोप लगा रहा है | अगर कमरे आवंटित नहीं थे तो नोटिस क्यों निकाला गया कि अपना समान ले जाओ ? एक छात्र ने हमें बताया कि सभी विद्यार्थियों के पास स्लिप है कि कमरें उन्हें आवंटित थे | प्रबंधन अपनी गलतियां छात्रों के ऊपर थोप रहा है |

सवाल यह है कि हरियाणा का टॉप विश्वविद्यालय कहने वाले वहां के, कुलपति प्रो दिनेश कुमार चुप्पी क्यों साधे हुए हैं ? विद्यार्थियों का लाखों का समान गायब है उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा ? छात्रों की समस्या कौन सुनेगा ? हॉस्टल प्रबंधन तो कुछ करने नहीं वाला बल्कि ” विकास कुमार” नामक अधिकारी कोई भी सवाल के जवाब देने से बच रहे हैं |

हॉस्टल छात्रों का दूसरा घर होता है | माँ – बाप भरोसे से अपनी संतान को हॉस्टल में भेजते हैं | लेकिन अगर वाईएमसीए जैसा हॉस्टल प्रबंधन हो तो कोई भी अभीभावक हज़ारों बार सोचेगा क्योंकि यहाँ के हॉस्टल प्रबंधन को कुछ भी लहज़ा नहीं है बात करने का अपनी दादागिरी छात्रों पर दिखाते हैं | विकास कुमार जैसे अधिकारी विश्वविद्यालय का नाम ख़राब कर रहे हैं | विद्यार्थी आस लगाए बैठे हैं कि कोई हल निकले लेकिन अभी तक पूरा प्रबंधन चुप है |

जिस तरह राजनितिक दल की सफलता उसके बेहतर संगठन पर टिकी होती है उसी तरह किसी बेहतर विश्वविद्यालय का नाम अपने अच्छे प्रबंधन से रोशन होता है | वाईएमसीए का हॉस्टल प्रबंधन विश्वविद्यालय की छवि ख़राब कर रहा है |

Written By – Om Sethi

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