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रेडियो जॉकी पर गूंजेगी सेंट्रल जेल की महिला कैदी की आवाज, 6 महिलाओं को आर.जे. के लिए मिलेगी ट्रेनिंग

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आर.जे. एक ऐसे प्रचलित शब्द है, जिसे भले ही किसी ने ना देखा हो लेकिन गाड़ी में रेडियो चलाकर मनोरंजन करने वाले आर.जे की आवाज हर किसी को भा जाती हैं वैसे तो देशभर में अनेकों ऐसे हैं जिनकी आवाज के श्रोता दीवाने होते हैं लेकिन अब ऐसे ही आरजे के लिए हरियाणा के अंबाला में सेंट्रल जेल की महिला कैदियों को ट्रेनिंग दी जा रही है जल्दी महिला कैदियों की आवाज भी आर ज के तौर पर आमजन के बीच गूंजेगी।

इस समय जेल रेडियो पर कैदियों द्वारा अपनी कला व हुनर का प्रदर्शन बखूबी किया जा रहा है। जेल रेडियो में कैदियों द्वारा सुबह एक घंटे धार्मिक संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाता है और शाम के समय दो घंटे अन्य कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक प्रस्तुतीकरण किया जा रहा है।

रेडियो जॉकी पर गूंजेगी सेंट्रल जेल की महिला कैदी की आवाज, 6 महिलाओं को आर.जे. के लिए मिलेगी ट्रेनिंग

दरअसल, हरियाणा के अंबाला में अब सेंट्रल जेल की महिला कैदी रेडियो जॉकी बनकर श्रोताओं का मनोरंजन करेंगी। इनके कार्यक्रमों की प्रस्तुति अंबाला जेल रेडियो पर होगी। इसके लिए बकायदा छह महिला कैदियों को रेडियो जॉकी के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।बताते चलें कि अंबाला सेंट्रल जेल में कैदियों द्वारा इस साल शुरू किए गए जेल रेडियो को जेल में बंद कैदियों द्वारा बेहद पसंद किया जा रहा है। अब जेल में बंद महिला कैदियों ने भी इसी तरह के कार्यक्रम उनके द्वारा शुरू करने और रेडियो जॉकी बनने की इच्छा जताई है। महिला कैदियों की मांग पर अब जेल रेडियो महिला ब्लॉक में भी शुरू करने का प्रस्ताव है।

अंबाला सेंट्रल जेल के अधीक्षक लखबीर सिंह के अनुसार पहले चरण में छह महिला कैदियों को तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक और जिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की प्रमुख डॉ. वर्तिका नंदा द्वारा ट्रेनिंग देने की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिसे नए वर्ष पर शुरू किया जाएगा।

रेडियो जॉकी पर गूंजेगी सेंट्रल जेल की महिला कैदी की आवाज, 6 महिलाओं को आर.जे. के लिए मिलेगी ट्रेनिंग

उन्होंने बताया कि इसी कड़ी में पुरुष कैदियों को दूसरे चरण का प्रशिक्षण देने हेतु छह ओर कैदियों के चयन हेतु ट्रायल लिए जा रहे है। उन्होंने बताया कि सेंट्रल जेल अंबाला में चल रहे जेल रेडियो के कार्यक्रम को कैदियों द्वारा बेहद पसंद किया जा रहा है। अब कोविड की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए एहतियात व सुरक्षा की दृष्टि से कैदियों को ये ट्रेनिंग ऑनलाइन प्लेटफार्म के माध्यम से प्रदान की जायेगी। यह एक अच्छा विचार हैं कि भले जेल के भीतर से लेकिन कला को उजागर किया जा रहा हैं।

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