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रूस भारत को दे रहा है S-400 मिसाइल , चीन ने कहा अभी मत दो, जानिए क्यू खास है यह

रूस भारत को दे रहा है S-400 मिसाइल, चीन ने घबरा कर कहा अभी मत दो, जानिए क्यू खास है यह मिसाईल :- भारत और चीन के बीच करीब एक महीने से चल रहे तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को समर्थन मिल रहा है। जिसे देखकर चीन बौखला गया है और भारत के खिलाफ साजिश करने में जुट गया है।

चीन के सरकारी अखबार पीपल्स डेली ने फेसबुक पर सोसायटी फॉर ओरिएंटल स्टडीज ऑफ रूस नाम के ग्रुप में लिखा कि विशेषज्ञों के अनुसार अगर रूस को चीनी और भारतीय के दिल पिघलाने हैं तो भारत को ऐसे संवेदनशील वक्त में हथियार नहीं देने चाहिए।

S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली

S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली

आपको बता दें कि दोनों एशियाई ताकते रूस की करीबी सहयोगी माने जाते हैं, लद्दाख में चीन के साथ जारी तनाव के बीच भारत जल्द से जल्द रूप से 30 लड़ाकू विमान खरीदना चाहता है।

जिसे लेकर मॉस्को पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रूसी डिप्टी से मुलाकात की है और उन्होंने कहा कि रूस भारत से हुए रक्षा करार को जल्द पूरा करेगा।

चीनी रक्षा मंत्रालय का बयान

चीनी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत चीन सीमा पर हुए संघर्षों की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष की है, हम आशा करते हैं कि सीमा इलाकों में शांति व स्थिरता बनी रहेगी। गलवान घाटी में हिंसा की घटना भारतीय पक्ष के एकतरफा उकसाने की कार्यवाही और दोनों पक्षों के बीच हुई वापसी सहमति के उल्लंघन की वजह से ही ऐसा हुआ है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रूस का दौरा किया। वह आधिकारिक रूप से रूस की विजय परेड में शामिल हुए थे, लेकिन उनकी यात्रा का उद्देश्य भारत और रूस, विशेष रूप से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली के बीच जल्द से जल्द रक्षा सौदों की आपूर्ति करना था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यात्रा के कारण चीन बोखला गया है और वह नहीं चाहता कि रूस जल्द से जल्द भारत को S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति प्रदान करे।

S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली

भारत की है साफ रणनीति

भारत ने इस रक्षा प्रणाली के लिए वर्ष 2018 में रूस के साथ 5.43 बिलियन डॉलर (38 हजार 933 करोड़ रुपये) के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे ।

चीन अब के साथ बढ़ते तनाव के कारण भारत दुनिया की सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली जल्द से जल्द चाहता है। साथ ही, भारत ने Su-30 MKI और MiG-29 सहित 33 अतिरिक्त फाइटर जेट्स का भी आदेश दिया है।

यही कारण है कि चीन द्र हुवा है चीन ने अपने मुखपत्र पीपुल्स डेली के माध्यम से यह एजेंडा थोपने की कोशिश की कि भारत को ऐसे संवेदनशील अवसर पर S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की आपूर्ति नहीं करनी चाहिए यदि रूस चीनियों के दिलों पर कब्जा करना चाहता है।

पीपुल्स डेली ने एक फेसबुक ग्रुप सोसाइटी फॉर ओरिएंटल स्टडीज ऑफ रशिया ’पर लिखा है कि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रूस चीनी और भारतीयों के दिल में जगह बनाना चाहता है, तो भारत को हथियार न बेचें। इस मीडिया हाउस ने यह भी लिखा कि चीन के साथ सीमा विवाद के कारण, भारत जल्द से जल्द 30 फाइटर जेट खरीदना चाहता है जिसमें मिग 29 और सुखोई 30 एमकेआई शामिल हैं।

S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, “भारत-रूस संबंध एक अद्वितीय और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। हमारा रक्षा संबंध इसके महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है।” रक्षा मंत्री ने यह भी कहा की,

“दोनों के बीच चर्चा बहुत सकारात्मक थी। आश्वस्त किया गया है कि दोनों देशों के बीच चल रहे अनुबंधों को बरकरार रखा जाएगा और न केवल बरकरार रखा जाएगा, बल्कि कई मामलों में थोड़े समय के लिए बढ़ाया जाएगा। हमारे सभी प्रस्तावों को रूस से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। मैं चर्चा से पूरी तरह से संतुष्ट हूं।”

चीन की इस घबराहट को देखते हुए, यह समझा जा सकता है कि वह भारत और रूस के बीच बढ़ते संबंधों से बेचैन हो गया है और अब उसे डर है कि रूस भारत को S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली दे सकता है। इसलिए, यह अपने मीडिया के माध्यम से एस -400 की आपूर्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।

लेकिन यह प्रयास विफल हो गया और रूस और भारत के रक्षा मंत्री ने संकेत दिया कि रूस समय से पहले भारत को एस -400 की आपूर्ति कर सकता है।

S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली
S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली

S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की क्षमता

आपको बता दें कि मिसाइल हमले की स्थिति में S-400 सिस्टम स्व-सक्रिय होता है और दुश्मन के मिसाइल या लड़ाकू विमान हवा में अपना निशाना बना सकते हैं। यह मिसाइल हवा में 400 किमी रेंज में गिरने वाली किसी भी प्रकार की मिसाइल या 5 वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को भी मार सकता है।

S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली एक तरह की मिसाइल शील्ड की तरह काम करेगा, जो भारत को पाकिस्तान और चीन की न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाएगा। यह प्रणाली एक बार में 72 मिसाइलों को दाग सकती है और साथ ही साथ परमाणु क्षमता की 36 मिसाइलों को नष्ट कर सकती है।

रूस किसी भी स्थिति में भारत का समर्थन करेगा चाहे वह चीन के साथ विवाद हो या कोई अन्य। इससे पहले भारत ने रूस से 33 अतिरिक्त फाइटर जेट्स भरने को भी कहा है।

इस तरह, भारत के साथ समझौते से, रूस ने संकेत दिया है कि वह किस ओर झुक रहा है। रूसी सरकार द्वारा अधिकृत रूस टुडे के लद्दाख मामले पर कवरेज भारत के पक्ष में रहा है।

Written by- Prashant K Sonni

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