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हरियाणा के निजी विद्यालय सरकार से मांग रहे, ऐसा राहत पैकेज

विद्या हो या विज्ञान सब पर भारी है कोरोना का वार | महामारी के आए हुए 6 माह बीत चुके हैं, सभी आस लगाए बैठे हैं कि कब वो दिन आएगा जब इस से निजात मिलेगा | कोरोना से बंद पड़े स्कूल आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं |

हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ व इंटीग्रेटेड प्राइवेट स्कूल वेलफेयर सोसायटी ने लॉकडाउन अवधि के दौरान स्कूल बसों के टैक्स व बिजली बिल माफ करने की मांग की है। साथ ही अस्थाई मान्यता वाले स्कूलों को एक साल की एक्सटेंशन और सभी बच्चों के खाते में हर महीने 1125 रुपये डालने की गुजारिश की, ताकि वह फीस जमा कर सकें।

बहुत से स्कूलों का तो ऐसा भी कहना है कि उनके पास स्टाफ को देने के लिए पैसा नहीं है | प्रधामंत्री के 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज से भले ही सबको थोड़ी राहत मिली हो, लेकिन स्कूल वालों का हाल नहीं बदला है | प्रदेश के प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यवान कुंडू,

उपप्रधान सौरभ व संरक्षक तेलूराम ने कहा कि बसों का किराया नहीं मिलने से स्कूल संचालक बैंक लोन की किस्तें व बीमा भरने में असमर्थ हो गए हैं। चुनिंदा स्कूलों को छोड़कर अन्य स्कूलों में पांच फीसद फीस भी जमा नहीं हुई। इससे करीब 20 हजार स्कूलों के लाखों कर्मचारियों का वेतन तीन महीने से रुका हुआ है।

वेतन न मिलने से लाखों स्कूल में काम करने वालों के पास वेतन नहीं गयी है | आर्थिक तंगी से जूझ रहे टीचरों का यह टेस्ट है | कुंडू ने कहा कि नियम 134 के तहत क्षतिपूर्ति की बकाया राशि जारी करने की मांग की और जिन स्कूलों की स्थाई मान्यता को दस वर्ष पूरे हो चुके हैं, उनकी मान्यता को रिन्यू करने के बजाय एफिडेविट लेकर मान्यता प्रदान कर दी जाए। करीब 3200 अस्थाई मान्यता प्राप्त स्कूलों को एक साल की एक्सटेंशन मिले।

Written By – Om Sethi

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