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सिर्फ 7 महिलाओं ने मिलकर शुरू किया था लिज्जत पापड़ का कारोबार, आज 1600 करोड़ रुपए का टर्नओवर कर रही कंपनी

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जिस दिन लिज्जत का पहला पापड़ बेला गया था, उस दिन शायद किसी ने ये सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन यह एक बड़ा उद्योग बनेगा। लिज्जत पापड़ का स्वाद शायद ही देश में कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने नहीं चखा हो। देश के हर कोने में लिज्जत पापड़ को जाना जाता है। लिज्जत पापड बनाने का काम सात गुजराती महिलाओं ने शुरू किया था। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि यह कारोबार इतना अधिक बढ़ जाएगा कि 45 हजार महिलाओं को रोजगार देगा।

किसी भी चीज़ की शरुवात से पहले आपको निरंतर तत्परता से काम करना होता है। अब इस कंपनी का टर्नओवर 1600 करोड़ रुपए में पहुंच चुका है। हर उम्र का व्यक्ति लिज्जत पापड़ को पसंद करता है। किरायने की हर दुकान पर लिज्जत पापड़ नजर आता है।

सिर्फ 7 महिलाओं ने मिलकर शुरू किया था लिज्जत पापड़ का कारोबार, आज 1600 करोड़ रुपए का टर्नओवर कर रही कंपनी

हमारे समाज में औरतों को हमेशा पुरुषों से कम ही आंका जाता है लेकिन जिन महिलाओं ने इस कारोबार को शुरू किया आज वह सभी के लिए प्रेरणा बन गयी हैं। वर्ष 1959 के गर्मियों की बात है। मुंबई के गिरगांव इलाके में लोहान निवास नाम की एक इमारत थी। उसकी छत पर सात गुजराती महिलाएं बैठक के लिए एकत्र हुई। एजेंडा था वह अपने खाली समय का प्रयोग कैसे करे। जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आए।

सिर्फ 7 महिलाओं ने मिलकर शुरू किया था लिज्जत पापड़ का कारोबार, आज 1600 करोड़ रुपए का टर्नओवर कर रही कंपनी

उस बैठक में देश को एक स्वादिष्ट पापड़ मिलने वाला था और काफी देर विचार विर्मश करने के बाद तय हुआ कि वह अपने घर में पापड़ बनाएगी। इन पापड़ को वह बाजार में जाकर बेचेगी। 80 रुपए कर्ज लेकर पापड़ का सामान लाया गया। महिलाओं के पास पापड़ का सामान लाने के भी पैसे नहीं थे। पापड़ बेेचने में पुरुषोत्तम दामोदर दत्तानी ने उनकी मदद की। सभी महिलाओं ने मिलकर पहले दिन 4 पैकेट पापड़ बनाए।

सिर्फ 7 महिलाओं ने मिलकर शुरू किया था लिज्जत पापड़ का कारोबार, आज 1600 करोड़ रुपए का टर्नओवर कर रही कंपनी

आज लिज्जत पापड़ के बिना कई घरों में रोटी नहीं बनती है। रोटी के साथ पापड़ का स्वाद सभी को भा गया है। तब उन चार पैकेट गिरगांव के आनंदजी प्रेमजी स्टोर से बेच दिए। पहले दिन एक किलो पापड़ बेचकर 50 पैसे की कमाई हुई। अगले दिन एक रुपए। धीरे धीरे कमाई बढऩी शुरू हो गई। महिलाओं का जुडऩा भी शुरू हो गया। चार महीनों में ही 200 से अधिक महिलाएं जुड़़ गयी थीं।

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