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जाने क्या है मधुश्रावणी व्रत का महत्व ,कोरोना काल में कैसे करें इसे संपूर्ण

हिंदू धर्म में शास्त्रों में भोले भंडारी भगवान शंकर जी एवं माता पार्वती के विवाह की महिमा अनेक रूपों में मिलता है, कहा जाता है कि इनका विवाह पढ़े ही भव्य तरीके से संपन्न हुआ था| माता पार्वती शिव शंकर की विवाह की कहानी बहुत ही पवित्र मानी जाती है| किसी के विवाह के दौरान भी माता पार्वती और शिव शंकर के विवाह की कहानी सुनाई जाती है|

सावन के महीने में भी इस कथा का अपना अलग ही महत्व है|हर सावन के महीने में नवविवाहित स्त्रियां शिव पार्वती की पूजा आराधना करती हैं एवं उनके विवाह की कहानी सुनती हैं|

इस वर्ष मिथिलांचल का मधुश्रावणी व्रत गुरुवार 23 जुलाई को पूर्ण होगा शहर के विभिन्न इलाकों में रहने वाली मैथिल समाज की नवविवाहिता ने सावन मास में 14 दिन तक व्रत और विधि विधान से पूजा करती है| फरीदाबाद में भी इस पर्व को महिलाएं पूरे रीति रिवाज से बना रही हैं |

बता दें कि यह है कि यह पर्व इस वर्ष 14 दिनों तक चलेगा| जो 23 जुलाई को पूरा हो रहा है| हर दिन भगवान शंकर और पार्वती के ग्रस्त जीवन की विभिन्न प्रसंगों से से जुड़ी कथाएं नवविवाहित स्त्रियां सुन रही है और सुनेगी| हर दिन पूजा और नई खत्म हो रही है| शाम को फूल पत्ते के लिए नवविवाहिता अपनी सहेली और दूसरों के साथ निकलती हैं| इसी फूल पत्ते से दूसरे दिन भगवान और पुरुष हरा की पूजा होगी| यह पर्व मधुश्रावणी से जुड़ा हुआ पर्व है|

इसमें ताजे फूल पत्ते से पूजा नहीं की जाती इस पर्व के दौरान पेड़ से गिरे फूल पत्ते ही चुने जाते हैं| सावन में इन पेड़ों के फूल पत्ते तोड़ना वर्जित है| पूजा का दैनिक नियम व्रत के समापन तक जारी रहता है|

भगवान शंकर पार्वती और नाग नागिन प्रवृत्ति के देवता माने जाते हैं| इसमें वृद्धि हर दिन ससुराल से आए खानपान का भी इस्तेमाल करती है| इस दौरान हर घर पर होने वाली कथा में आसपास के सभी लोगों को आमंत्रित किया जाता है, लेकिन कोरोनावायरस के चलते इस साल सिर्फ घर की महिलाओं के साथ ही पूजा व कथा की जा रही है|

इस वर्ष मिथिलांचल का मधुश्रावणी व्रत गुरुवार 23 जुलाई को पूर्ण होगा शहर के विभिन्न इलाकों में रहने वाली मैथिल समाज की नवविवाहिता ने सावन मास में 14 दिन तक व्रत और विधि विधान से पूजा करती है| फरीदाबाद में भी इस पर्व को महिलाएं पूरे रीति रिवाज से बना रही हैं

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