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जनता को मारकर चैन से सो रही है सरकार ? : मैं हूँ फरीदाबाद

नमस्कार! मैं हूँ फरीदाबाद आज आप सब को बधाई देने आया हूँ। जानते हैं क्यों ? मेरे आका के एक फैसले ने आज मेरे क्षेत्र में कोरोना महामारी की झड़ी लगा दी है। हर तरफ बस मरीज़ ही मरीज़ हैं और मुश्किलों का अम्बार लगा हुआ है। पर इन मुश्किलों के बीच मेरी सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया। क्षेत्र के छोटे छोटे बच्चों को मौत के मुँह में धकेलने का फैसला।

हाँ हाँ पता है कि आप सब बच्चों के भविष्य को लेकर काफी परेशान थे। पर मेरी परेशानी का क्या ? मैं भी परेशान हूँ आप सबके लिए जो मेरी गलियों में अपने जीवन का निर्वाह कर रहे हैं। क्या आप जानते हैं कि आज कितने लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आये हैं ? नहीं आप कहाँ से जानेंगे क्यों की आप भी तो रिया सुशांत केस की गुत्थी सुलझाने में मसरूफ हैं।

पर मैं आपको सच बताता हूँ, पिछले 24 घंटों में 281 नए कोरोना मामले सामने आए हैं। कल भी यह आंकड़ा 200 के पार पंहुचा हुआ था। इसका कारण जानते हैं आप? इसके पीछे की वजह है बिना सोचे समझे तैश में लिए गए फैसले। सरकार के आदेश अनुसार मेरे क्षेत्र में भी प्रवेश परीक्षाएं करवाई गईं और उन परीक्षाओं के परिणाम स्वरुप हमे कोरोना के नए मरीज मिले।

मैं नहीं जानता यह फैसला सही था या फिर गलत पर ये जरूर जनता हूँ कि मेरे प्रांगण में और संक्रमितों के मिलने के पीछे सरकार के इस फैसले का हाथ है। पर दोष सिर्फ प्रशासन के मत्थे नहीं मढ़ा जा सकता। जनता भी कुछ कम नहीं। मैं देखता सबको कैसे सामाजिक दूरी का खंडन करते हैं सब। कोई मास्क पहनना भूल जाता है। किसी को सामजिक दूरी बनाना रास नहीं आता है।

ऐसे में संक्रमण तो फैलेगा ही। कब समझेंगे आप सब कि एक हाथ की दूरी अभी भी है जरूरी। आज जब कोरोना की चपेट में आए 2 मृतकों की अंतिम यात्रा को देखा तो आँखे छलक आई। जानते हैं क्यों? क्योंकि उन्हें अपने अंतिम समय में किसी का भी साथ नहीं मिल पाया। मैं नहीं चाहता कि मेरा कोई अपना इस तरीके से अलविदा कहे। मेरी गुहार सुनो सरकार अब कुछ करो। तुम्हारा नींद से जागना ज़रूरी है।

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