Pehchan Faridabad
Know Your City

बिजली की तारों में उलझ कर दम तोड़ रहे हैं फरीदाबाद वासी : मैं हूँ फरीदाबाद

नमस्कार! मैं हूँ फरीदाबाद, आपका अपना जर्जर होता शहर। मैं आज कल उलझन में हूँ जानते हैं क्यों? क्यों कि मुझे उलझाया हुआ है क्षेत्र में बिछी हुई बिजली की तारों ने। मेरी हर गली में एक न एक बिजली का खम्बा जरूर है जिसमे तारों का जंजाल बिछा हुआ है।

इन बिजली की तारों ने न जाने कितनो की जान ली है। कल की ही बात बताता हूँ, कल मेरे प्रांगण से एक कलाकार की अर्थी उठी है। कारण जानते हैं उस रंगकर्मी की मौत का। उसकी मौत के पीछे इन बिजली की तारों का हाथ है। हर खम्बे पर बिजली की तारें ऐसे लिपटी हुई होती है जैसे चन्दन के पेड़ पर भुजंग लिपटा हो।

वह कलाकार अपने पीछे अपना पूरा परिवार छोड़कर गया है। उसकी पत्नी और उसकी बच्ची दोनों निशब्द हैं। वह सदमे में हैं उन्हें नहीं पता कि उन्हें किस गलती की सजा मिली है। पर उन मासूमों को कैसे समझाऊं कि गलती उनकी नहीं गलती तो प्रशासन की है।

झूठे वादों और जुमलों की सरकार बनाई हुई है इस क्षेत्र में। जनता की जान का शायद कोई मोल नहीं तभी तो बिजली की तारों को नंगा छोड़ रखा है। अरे जरा उस मासूम लड़के की माँ से पूछो उसके दुःख के बारे में जिसने अपने लाल को बिजली के झटके से झुलसते हुए देखा है।

क्या उसके जिगर का टुकड़ा वापस मिल पाएगा उसे? वो आठ साल का लड़का अपनी छत पर खेलते खेलते इस दुनिया से रुखसत हो गया और कारण एक बार फिर से वही बिजली की तारे बानी। मैं सवाल दागना चाहता हूँ प्रशासन पर कि कब तक मेरी मासूम जनता को बिजली के झटकों से झुलस कर अपनी जान गवानी पड़ेगी।

मुझसे नहीं सुना जाता इन मासूमों का क्रंदन। दिल बैठ जाता है जब अपनी जनता को दुःख सहते हुए देखता हूँ। मेरे निजाम मेरी अपील मानो इन तारों को रबर से ढको या फिर पाइप लगाकर इन्हे सही करवाओ। मैं नहीं चाहता की फरीदाबाद की जनता के सिर पर बिजली की यह तारें मौत का तांडव करें।

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More