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खोखली साबित हो रही है सरकारी स्कूल के छात्रों को शिक्षित करने की कवायद

युवाओं को देश का भविष्य कहा जाता है, तो ऐसे में जब युवाओं के हाथो में देश की बागडोर संभालने की कवायद होगी तो देश को शिक्षित युवा वर्ग की जरूरत होगी। शिक्षा के लिए एक छात्र और शिक्षक की मध्य एक कड़ी का जुड़ना जरूरी होता है।

जिसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका एक स्कूल प्रबंधन की होती है। जो सैकड़ों छात्रों के भविष्य को संवारने का जिम्मा अपने कंधो पर लेते हैं।लेकिन कुछ या यूं कहें अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को एक बेहतरीन भविष्य देना तो चाहते है, लेकिन आर्थिक संकट उनके हाथो को बांध देती हैं।

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ऐसे में उनकी इस चाह को सरकार स्कूल पूरा करने का आह्वान करते हैं। अभिभावकों को यह यकीन दिल कर की भले ही सरकारी स्कूलों में चमक धमक की लहर दौड़ ती नहीं देखी जा रही हो पर सीमित संसाधनों के स्तर पर उनके बच्चों का जीवन संवारा जाएगा। हम यहां यह बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि लोक डाउन ने बच्चों की शिक्षा को नुकसान हो रहा है।

क्योंकि अभिभावक स्वयं को शिक्षित नहीं होते ऐसे में जब स्कूल भी बन्द हो तो उनके बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूबा दिखाई दे रहा है। और ऐसे में इन छात्रों के भविष्य को संवारने में कार्य करने के स्वरूप को सरकार ने टेलीविज़न का नाम लेकर सुधारने का प्रयास कर रही हैं। सरकार ने आदेश दिए है कि सरकारी स्कूलों के छात्रों को पढ़ाने के लिए टीवी चैनल्स में कुछ चैनलों को छात्रों को पढ़ाने के लिए निश्चित किया है।

लेकिन से ही सोचिए जिन लोगों के पास स्कूल की फीस जमा करने की क्षमता ना हो उनके घरों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीद की कल्पना करना तो उम्मीद से भी दूर है। तो ऐसे में सरकार द्वारा छात्रों को पढ़ाने की कवायत खोखली साबित हो रही है।

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